एक आवारा शायर ही यह बात कह सकता है – शायरी की दुकान भाग-1

0 26

शायरी 1

सरे बाज़ार निकलूं तो आवारगी की तोहमत,
तन्हाई में बैठूं तो इल्जाम-ए-मोहब्बत.
ना शाखों ने पनाह दी,ना हवाओ ने बक्शा,
वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता.

शायरी 2

राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर,
कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है.
मोहब्बत एक खुशबू है हमेशा साथ रहती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी कभी तन्हा नहीं रहता.

शायरी 3

मुहब्बत मेरी भी बहुत असर करती है
याद आएंगे बहुत जरा भूल के देखो.
आईना फैला रहा है खुदफरेबी का ये मर्ज,
हर किसी से कह रहा है आप सा कोई नहीं.

शायरी 4

मुझको ढूंढ लेती है रोज़ एक नए बहाने से
तेरी याद वाक़िफ़ हो गयी है मेरे हर ठिकाने से
वो चैन से बैठे हैं मेरे दिल को मिटा कर
ये भी नहीं अहसास के क्या चीज़ मिटा दी.

शायरी 5

तेरे प्यार में जल रहा हू तेरी याद में रो रहा हू
तेरी नींद को सुन रहा हू तेरे ख्वाब में सो गया हू.
इंतज़ार था तेरे प्यार का बेक़रार था तेरे प्यार का
दिल में अगन कुछ यु लगी रंगी ये शाम ढल ने लगी.

शायरी 6

मेरी साँसों में इन निगाहों में दिल की आहो में तुम ही तुम जो हो
मेरी ख़ामोशी, मेरी गुफ्तगू मेरे रू बरु, तुम ही तुम तो हो.
जुदा क्यों हुए सोचता हूँ तुझे रहो मैं ढूंढ़ता हू
तेरे प्यार में जल रहा हू तेरी याद मैं रो रहा हू.

शायरी 7

तोड़ दिए मैंने घर के आईने सभी,
प्यार में हारे हुए लोग मुझसे देखे नहीं जाते.

शायरी 8

मोहब्बत का मेरे सफर आख़िरी है,
ये कागज कलम ये गजल आख़िरी है,
मैं फिर ना मिलूँगा कहीं ढूंढ लेना,
तेरे दर्द का अब ये असर आख़िरी है.

 

अक्सर प्यार में इंसान को ये 3 चीजें जरूर मिलती है, प्यार करने वाले यह विडियो जरूर देखें

सभी ख़बरें अपने मोबाइल में पढ़ने के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करे sabkuchgyan एंड्राइड ऐप- Download Now

loading...
loading...

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.