एक नई सीख़

0 886
Join Telegram Group Join Now
WhatsApp Group Join Now

जब अँगूर खरीदने बाजार गया ।
पूछा “क्या भाव है?
बोला : “80 रूपये किलो ।”
पास ही कुछ अलग-अलग टूटे हुए अंगूरों के दाने पडे थे ।
मैंने पूछा: “क्या भाव है” इनका ?”
वो बोला : “30 रूपये किलो”
मैंने पूछा : “इतना कम दाम क्यों..?
वो बोला : “साहब, हैं तो ये भी बहुत बढ़िया..!!
लेकिन … अपने गुच्छे से टूट गए हैं ।”
मैं समझ गया कि … संगठन…समाज और परिवार से अलग होने पर हमारी कीमत……आधे से भी कम रह जाती है।
कृपया अपने परिवार एवम् मित्रोसे हमेशा जुड़े रहे।

Join Telegram Group Join Now
WhatsApp Group Join Now
Ads
Ads
Leave A Reply

Your email address will not be published.