प्रेरणादायक कहानी – नजरिया

0 1,662
Join Telegram Group Join Now
WhatsApp Group Join Now

Inspiring story in Hindi एक अस्पताल के कमरे में दो बुजुर्ग भर्ती थे.  एक उठकर बैठ सकता था परंतु दूसरा उठ नहीं सकता था जो उठ सकता था, उसके पास एक खिडकी थी वह बाहर खुलती थी. वह बुजुर्ग उठकर बैठता और दूसरे बुजुर्ग जो उठ नहीं सकता उसे बाहर के दृश्य का वर्णन करता…. सडक पर दौडती हुई गाडियां काम के लिये भागते लोग… वह पास के पार्क के बारे में बताता कैसे बच्चे खेल रहे हैं कैसे युवा जोडे हाथ में हाथ डालकर बैठे हैं कैसे नौजवान कसरत कर रहे हैं आदि आदि …..

दूसरा बुजुर्ग आँखे बन्द करके अपने बिस्तर पर पडा पडा उन दृश्यों का आनन्द लेता रहता. वह अस्पताल के सभी डॉ., नर्सो से भी बहुत अच्छी बातें करता.

ऐसे ही कई माह गुजर गये एक दिन सुबह के पाली वाली नर्स आयी तो उसने देखा कि वह बुजुर्ग तो उठा ही नहीं है ऩर्स ने उसे जगाने की कोशिश की तो पता चला वह तो नींद में ही चल बसा था. आवश्यक कार्यवाही के बाद दूसरे बुजुर्ग का पडोस खाली हो चुका था वह बहुत दु:खी हुआ खैर, उसने इच्छा जाहिर की कि उसे पडोस के बिस्तर पर शिफ्ट कर दिया जाय. अब बुजुर्ग खिडकी के पास था उसने सोचा चलो कोशिश करके आज बाहर का दृश्य देखा जाय. काफी प्रयास कर वह कोहनी का सहारा लेकर उठा और बाहर देखा तो अरे यहां तो बाहर दीवार थी ना कोई सडक ना ही पार्क ना ही खुली हवा. उसने नर्स को बुलाकर पूछा तो नर्स ने बताया कि यह खिडकी इसी दीवार की तरफ खुलती हैं . उस बुजुर्ग ने कहा लेकिन… वह तो रोज मुझे नये दृश्य का वर्णन करता था.

नर्स ने मुस्कराकर कहा ये उनका जीवन का नजरीया था वे तो जन्म से अंधे थे| इसी सोच के कारण वे पिछले 2-3 सालों से कैंसर जैसी बिमारी से लड रहे थे.

सारांश: जीवन नजरीये का नाम है… अनगिनत खुशियां दूसरों के साथ बांटने में ही हमारी खुशियां छिपी हैं. खुशियां ज्यादा से ज्यादा शेयर करें लौटकर खुशियां ही जीवन में कोई “जमा” करता है, कोई घटाता है, कोई गुणा करता है, तो कोई भाग करता है, बस परमेश्वर है जो समय आने पर सब बराबर कर देता है.

Join Telegram Group Join Now
WhatsApp Group Join Now
Ads
Ads
Leave A Reply

Your email address will not be published.