दाईं तरफ ही सोकर क्यों उठना सेहत के लिए अच्छा- जानें

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क्या आपको पता है कि सोकर उठने की सही दिशा भी होती है? जी, हां! ऐसा है। विषेषज्ञों की मानें तो सोकर उठने के लिए दाईं दिशा उपयुक्त दिशा मानी जाती है। लेकिन सवाल उठता है कि इसके पीछे क्या तथ्य छिपा है? क्या यह तार्किक सवाल है? क्या वाकई दाई दिशा से सोकर उठने का कोई महत्व है? या फिर यह महज हमारा वहम है? हो सकता है ऐसे तमाम सवाल आपके जहन में घूम रहे हों।अगर सही दिशा के महत्व की अनदेखी करते हैं तो यकीन मानिए कई किस्म की बीमारियां आपको अपनी चपेट में ले सकती है। मसलन बदन दर्द, गर्दन दर्द, रीढ़ की हड्डी में दर्द आदि।सही दिशा में सोने का महत्व इतना है कि यदि इसको नजरंदाज किया जाए तो सोकर

उठने के तुरंत बाद हमारे सिरदर्द में दर्द हो सकता है, मन बोझिल हो सकता है। यहां तक कि हमें तनाव का एहसास भी हो सकता है। कहने का मतलब साफ है कि पर्याप्त नींद और सही दिशा, दोनों का हमारे स्वस्थवर्धक जीवन के लिए खास महत्व है।

दाईं दिशा से उठे

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ज्यादातर लोग काम करने हेतु दाएं हाथ का उपयोग करते हैं। मतलब यह कि कम लोग खब्बू होते हैं। आयुर्वेद और विज्ञान की मानें तो राइट हैंडेड यानी दाए हाथ से काम करने के अभ्यस्त होने के चलते बेहतर है कि हम दाईं दिशा को महत्व दें। जरूरी यह है कि सोकर दाईं दिशा से उठें।
इसे अपनी आदत बनाएं। यकीनन यह हमारे स्वास्थ्य पर गहरा सकारात्मक असर छोड़ता है। विज्ञान और आयुर्वेद के मुताबिक सोकर दाई दिशा से उठने पर हम कई शारीरिक समस्याओं से लड़ने की ताकत हासिल करते हैं। यही नहीं हमारा तन और मन शांत होता। तनाव हमसे दूर हो जाता है। असल में हमारे मस्तिष्क की दाईं दिशा बाईं दिशा की तुलना में ज्यादा सक्रिय होती है। यही कारण है कि हमें अपने सोकर दाईं दिशा से ही उठना चाहिए।

सही काम क्रिया स्थिति

जैसा कि कई बार जिक्र किया जा चुका है कि ज्यादातर लोग राइट हैंडेड होते हैं। यही कारण है कि यौन में प्रयोग करते हुए भी लोगों का दाया साइड ही ज्यादा सक्रिय होता है। कहने की जरूरत नहीं है कि काम क्रिया में प्रयोग के बाद गहरी नींद आती है और फिर जब उठते हैं तो दिशा का ध्यान नहीं रहता। जबकि यही हमारी गलती होती। हमें चाहिए कि सोकर उठने के लिए दाईं दिशा का चयन करें। दरअसल काम क्रिया बाद दाया साइड ज्यादा सक्रिय रहा होता है। यदि हम इस दिशा की अनदेखी करते हुए बाई दिशा से उठते हैं कि दाएं हाथ या दाएं अंग पर ज्यादा दबाव बन सकता। कोई नस खिच सकती है। यहां तक कि मसल्स में खिचाव भी बन सकता है।

हैंगओवर से बचाता है

मौजूदा युवा पीढ़ी पार्टी से लेकर तनाव तक में शराब पीने को तरजीह देती है। असल में गम, खुशी, तनाव। उनके लिए शराब एक साथी बनकर उभरा है। बहरहाल शराब पियेंगे तो हैंगओवर भी होगा। हैंगओवर होगा तो गहरी नींद भी आएगी और सुबह सिर में दर्द भी होगा। कहने का मतलब यह है कि ज्यादा शराब पीने के बाद सुबह उठते हुए सचेत रहना पड़ता है।
चूंकि ज्यादातर लोग बाएं हाथ से काम करने को तरजीह देते हैं, मतलब यह है कि उनका दाया हाथ या दाई दिशा ज्यादा सक्रिय होती है। यदि कोई हैंगओवर के बाद बाई दिशा से उठता है तो उसे चोट लगने डर रहता है। यही नहीं उसकी किसी वस्तु से टक्कर भी हो सकती है। यही नहीं बाया साइड कमजोर होने के चलते वह गिर भी सकता। अतः उठते वक्त दाई दिशा को चुनें ताकि चोट न लगे।

मन की शांति

आयुर्वेद के मुताबिक सही दिशा में सोना बेहद जरूरी है। यदि हम टेढ़े होकर सोते हैं तो उससे हमारे शरीर को आराम नहीं मिलता वरन मन बोझिल और तनाव से भर जाता है। ऐसे मन को शांति मिलना असंभव है। अतः सोने की दिशा उपयुक्त होना आवश्यक है। साथ ही सही दिशा में उठने से यह सोने पर सुहागा होता है। दरअसल सही दिशा में सोने के बाद सही दिशा में उठना हमारे मन में सकारात्मक ऊर्जा को प्रवाहित करता है, जिससे मन में शांति का संचार होता है। अतः मन की शांति के लिए दाईं दिशा का चयन करें।

इंजेक्शन

सामान्यतः इंजेक्शन उसी हाथ में लगवाया जाता है जो हाथ कम सक्रिय हो। हम जानते ही हैं कि लोगों का दाया हाथ कम सक्रिय होता है। यदि कोई व्यक्ति किसी मर्ज के कारण बार बार इंजेक्शन लगवाता हो तो उसके लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वह दाई दिशा से उठे। क्योंकि यदि वह बाई दिशा से उठेगा तो इंजेक्शन लगे हाथ में उसे दर्द हो सकता है। हालांकि इंजेक्शन लगना हमारे नसों की स्थिति पर निर्भर करता है। लेकिन यह भी सच है कि ज्यादातर समय बाएं हाथ में इंजेक्शन लगावा जाता है। अतः दाईं दिशा का चयन करना समझदारी है।

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