हँसगुल्ले

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1. मोहन (रिक्शेवाले से)- भैया स्टेशन जाने का क्या लोगे?

रिक्शेवाला- बीस रुपया
मोहन- और सामान का?
रिक्शेवाला- कुछ नहीं
मोहन- तो आप सामान लेकर चलो मैं पीछे-पीछे पैदल आता हूँ।

2. छात्र (माँ से)- मैं स्कूल नहीं जाऊँगा। हमारे गुरु जी को कुछ हो गया है।
माँ- वो कैसे
छात्र- कल कहते थे कि दस और दस बीस होता है। लेकिन अब कहते है कि बारह और आठ बीस होते है।

3. एक आदमी दूसरे आदमी से कहता है- भैया आपकी घड़ी में क्या समय हुआ है।
दूसरा आदमी- सात बजे रहे है
पहला आदमी बोलता है – ‘कि यह घड़ी रेडियो टाइम से मिली है।’
दूसरा आदमी बोलता है- ‘नहीं यह मुझे ससुराल से मिली है।’

4. अंग्रेज़ी की अध्यापिका- बच्चों हम अंग्रेज़ी के कुछ शब्दो को छोटा करके बोलेगा। जैसे डैडी को डैड, मम्मी को मैम। इस प्रकार से बोलेंगे।
एक लड़का- तो हम मैडम को मैम कहकर बुला सकते है न।

5. एक नेताजी भाषण दे रहे थे। उनका पैजामा कुछ ढीला था। वह बार बार अपने पैजामे को ऊपर की तरफ खींच रहे थे।
एक आदमी से रहा नहीं गया। वह बोला- नेताजी आपका भाषण तो बहुत अच्छा है लेकिन आप जो यह बार बार अपना पैजामा ऊपर खींचते है अच्छा नहीं लगता हैं।
नेताजी बोले- अगर ऊपर की तरफ नहीं खीचेंगे तो और बुरा लगेगा।

6. तीन गप्पी आपस में बाते कर रहे थे कि पहला कहता है- मेरे पिता जी इतनी गरम चाय पीते है, कि कटोरे में लेते ही मुँह से पी जाते है।
दूसरा- मेरे पापा तो इतनी गरम चाय पीते है कि केतली के मुँह से ही पी जाते है।

तीसरा गप्पी कहता है- मेरे पापा चाय की सामग्री मँुह में डाल लेते है फिर चुल्हे पर चढ़ जाते है।

7. ‘बेटा! रामू ये क्यों लड़ रहे हो?’- पिता जी ने कहा।
‘पापा आपने रामू को क्यों रखा है।’’ बेटे ने कहा।
‘घर के काम करने के लिए’- पिता ने कहा।
‘तो फिर वो मेरा होमवर्क क्यों नहीं करता?’- बेटा ने कहा।

8. एक दुकान पर लिखा था- यहाँ पर शादी का सारा सामान मिलता है। दुकान पर ग्राहक आया।
दुकानदार- हाँ साहब, बोलीए क्या चाहिए सूट, सेहरा या जूता?
ग्राहक- वो तो सब ठीक है, पर पहले आप दुल्हन तो दिखाओ।

9. डॉक्टर- अब आपकी तबियत कैसी है?
मरीज- पहले से ज़्यादा खराब हो गई है।
डॉक्टर- दवाई खा ली थी क्या?
मरीज- नहीं, दवाई की शीशी तो पूरी भरी थी।
डॉक्टर- अरे साहब, मैं पूछ रहा हूँ कि दवाई ली थी क्या?
मरीज- जी, आपने दी थी और मैंने ले ली थी।
डॉक्टर- अरे दवाई पी ली थी क्या?
मरीज- नहीं डॉक्टर साहब पीलिया तो मुझे था।
डॉक्टर – उफ, दवाई को मुँह लगाकर पेट में डाला था या नहीं?
मरीज- नहीं डॉक्टर साहब
डॉक्टर- क्यों?
मरीज- क्योंकि उसका ढक्कन बंद था।
डॉक्टर- तो उसे खोला क्यों नहीं?
मरीज- डॉक्टर साहब, आपने ही तो कहा था कि शीशी का ढक्कन बंद रखना।
डॉक्टर- तेरा इलाज मैं नहीं कर सकता।
मरीज- लेकिन, डॉक्टर साहब ये तो बता दो कि मैं ठीक कैसे होऊँगा?

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