लोनर नदी एक रहस्य: इस जगह कंपास और मोबाइल भी काम करना बंद कर देते हैं

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दर्शनीय स्थल। यह लोनर नदी जो असिताश्म जैसे आकार की है, प्रकृति रूप से नमकीन और खारी है। समय के साथ इसपर जंगल बन गया और सदाबहार वृक्षों ने इसके तले को हरे स्थान में बदल दिया है। लोनर नदी ने नासा के वैज्ञानिक और भारत के भूवैज्ञानिक के अफसरों को इन प्रश्नों के जवाब देने के लिए सक्रिय किया है। यह नदी एक ही समय में नमकीन और खारी क्यों है? इस पृथ्वी पर मुश्किल से मिलने वाले छोटे छोटे कीड़े इस नदी में क्यों पाए जाते हैं? ज्वालामुखी के कुछ हिस्सों में कंपास फेल और मोबाइल फ़ैल क्यों हो जाते हैं?

लोनर नदी एक वैज्ञानिक नदी है।यह धरती की सबसे बड़ी और बेसाल्टिक चट्टान में अति तेज असर डालने वाली एकमात्र नदी है। इस नदी का निर्माण 52.000 साल पहले हुआ था जब 2 मिलियन टन का उल्का पिंड धरती से करीब 90.000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से टकराया था। उसने 1.8 किलोमीटर चौड़ा और 150 मीटर गहरा गड्ढा कर दिया।

इसके नीचे क्या छिपा है?

अपने आप बनने वाली इस नदी और विश्व की ऐसी एकमात्र नदी के रहस्य आपकी जागरूकता को बढ़ाने के लिए काफी हैं। इस जगह जाइये और अपनी उत्सुकता को शांत कीजिये।

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