श्री कृष्ण ने बताएं थे मनुष्य के बर्बादी के 3 कारण, कहीं आपमें भी तो नहीं है ये गुण

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पाच हजार साल पहले भगवान श्री कृष्ण ने मनुष्य की बर्बादी के 3 ही कारण बताए थे। इस पोस्ट में हम एक कहानी के माध्यम से हम आपको वो 3 कारण बताएंगे। तो चलिए देखते ही कौनसे 3 कारण है? कहीं आपमें भी तो नहीं ये 3 कारण। अगर आपको हमारा पोस्ट अच्छा लगता है तो हमे फॉलो जरूर करे।

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प्राचीन काल में एक नगर के पास के एक जंगल में एक सन्यासी रहता था। संसार के तमाम आकर्षणों से दूर होकर उसने कई वर्षों की तपस्या से अपनी शक्तियों को जागरूक किया था। वह लोगो की हर समस्याओं का समाधान करता था। धीरे धीरे वह मशहूर होने लगा और यह बात राजा को पता चली। राजा ने सन्यासी से मिलने का फैसला किया और वह सन्यासी से मिले। राजा सन्यासी के बातो से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें अपने राज्य में चलने तथा महल में रहने का आग्रह किया। सन्यासी मान गए और राजा के साथ उनके महल में रहने लगे।

कुछ साल तक सन्यासी वहीं रहे। एक दिन राजा एअर राणी को पडोस के राज्य में जाना पड़ गया। उन्होंने एक नौकर को सन्यासी के भोजन आदि की जिम्मेदारी देकर निकल गए। एक दिन नौकर बीमार पड़ गया और आया ही नहीं, सन्यासी को खाना खिलाने वाला कोई नहीं था वह इंतजार करता रहा। और अंततः वह गुस्से में लाल हो गया तभी राजा और रानी वापिस आए। सन्यासी ने राजा को बहुत डाट फटकार लगाई और कहा कि तुम मेरी जिम्मेदारी नहीं उठा सकते थे तो क्यों मुझे लेकर आए। कुछ दिनों बाद मामला शांत हो गया।

कुछ दिनों बाद राजा को फीर से पड़ोस के राज्य में जाना पड़ गया। इस बार राजा ने अकेले जाने का फैसला किया और रानी को कड़े निर्देशों के साथ सन्यासी के सेवा के लिए रख दिया। रानी रोज़ समय पर सन्यासी को खाना भेज देती थी। एक दिन रानी खाना भेजना भूल गई और वह नहाने चली गई। सन्यासी को खाना नहीं मिला तो सन्यासी ने काफी इंतेजार के बाद महल में जाने का फैसला किया। सन्यासी महल में गया और उसकी नजर रानी पर पड़ी, सन्यासी अवाक रह गया, रानी की सुंदरता सन्यासी के मन में घर कर गई। रानी के अद्भुत रूप को देख कर सन्यासी उसे भुला नहीं पा रहा था। उसने खाना पीना छोड़ दिया और कुछ दिन तक ऐसे ही पड़ा रहा।

कुछ दिनों बाद राजा वापिस लौटे और सन्यासी से मिलने गए। राजा ने कहा क्या बात है आप बहुत कमजोर हो गए है, क्या मुझसे और कोई भूल हो गई है? तो संन्यासी ने कहा कि नहीं, मै आपकी रानी की अद्भुत सुंदरता की मोह में पड़ गया हूं, और मै उसे भुला नहीं पा रहा हूं, और अब मै रानी के बिना जिंदा नहीं रह सकता। राजा ने कहा यही बात है ना? मेरे साथ महल में चलिए मै आपको रानी को से दूंगा। राजा सन्यासी को लेकर महल में रानी के गए। राजा ने रानी से कहा कि सन्यासी आपकी सुंदरता के दीवाने हो चुके है, और बहुत कमजोर पड़ चुके है, और मै किसी ज्ञानी व्यक्ति की हत्या का पाप अपने सर नहीं लेना चाहता। क्या आप सन्यासी की मदद करना चाहेंगी? रानी ने कहा मै समझ गई क्या करना है, और राजा ने रानी को सन्यासी को सौंप दिया।

सन्यासी रानी को लेकर अपनी कुटिया में जाने लगे, रानी ने कहा कि हमे रहने के लिए एक घर चाहिए। सन्यासी ने राजा से कहा कि हमे रहने के लिए एक घर चाहिए, राजा ने उनके लिए तुरंत एक घर उपलब्ध करवाया। सन्यासी रानी को लेकर घर गया, रानी ने कहा यह घर तो बहुत गन्दा है इसे साफ करवाइए, सन्यासी राजा से कहके घर को साफ करवाया। राजा के हुक्म से घर को साफ करवा दिया गया। फिर नहा धोकर रानी बिस्तर पर बैठ गई और सन्यासी भी रानी के पास आ गया। रानी ने कहा ‘ क्या आप जानते नहीं की आप को थे और आज आप क्या बन गए है? आप एक महान सन्यासी थे जिनके आगे राजा भी झुक कर प्रणाम करता था, और आज वासना के कारण आप मेरे गुलाम हो गए है ‘ यह सुन कर सन्यासी को महसूस हुआ कि वह तो एक सन्यासी था जो सारी सुख सुविधाओं को छोड़ कर शांति की तलाश में जंगलों में चला गया थे।

यह सुन कर सन्यासी जोर जोर से चिल्लाए और कहा कि मुझे माफ़ कर दीजिए रानी मै उस दयालु राजा के रानी को अभी सौंफ कर आता हूं। रानी ने प्रश्न किया महाराज उस दिन जब आपको भोजन नहीं मिला था तो आप बहुत क्रोधित हो गए थे, मैंने आपका यह रूप पहली बार देखा था। और तभी से मैंने आपके व्यवहार में परिवर्तन देखा। सन्यासी ने समझाया, जब मै जंगल में था तो मुझे सुविधाए तो क्या समय पे भोजन भी नहीं मिलता था। लेकिन महल में आने के बाद मुझे सुविधाए मिली और मै इनकी मोह में फंस गया, मुझे इनके प्रति मोह हो गया, फिर इन्हें पाने का लालच हुआ, और जब मुझे ये नहीं मिली तो क्रोध उत्पन्न हुआ। सन्यासी ने बताया सच यही है इच्छा पूरी नहीं हुई तो क्रोध बढ़ता है, और पूरी हुई तो लालच बढ़ता है। और यही इच्छाओं की पूर्ति मुझे वासना के द्वार तक ले आई और मै आपके प्रति आकर्षित हो गया।

इसके बाद सन्यासी को समझ में आ गया कि उन्हें वापिस जंगलों में लौटना चाहिए और उन्होंने ऐसा ही किया। दोस्तो श्रीम्भगवद्गीता के सोलह वे अध्याय के इक्कीस से श्लोक में स्वयं श्रीकृष्ण ने नरक के तीन द्वार बताए है, और वो तीन द्वार है काम यानी वासना, क्रोध और लालच। जरा सोच कर देखो आज दुनिया में जितने भी गुनाह होते है उनके पीछे यही तीन कारण होते है। इसीलिए हमे जितना हो सके इनसे दूर रहना चाहिए, जब एक सन्यासी इस में फस सकता है तो हम तो आम बात है।

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