नार्को टेस्ट में आदमी क्यों अपने होश खो देता है, नार्को टेस्ट क्या होता है जानिये

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14 April 2018 : नार्को टेस्ट में व्यक्ति को ट्रुथ ड्रग नाम की एक साइकोएक्टिव दवा दी जाती है या सोडियम पेंटोथॉल का इन्जेक्शन लगाया जाता है। दवा का असर होते ही व्यक्ति को नींद आने लगती है जिससे उसके दिमाग का तुरंत प्रतिक्रिया करने वाला हिस्सा काम करना बंद कर देता है। इस स्थिति में उसके पास ज्यादा सोचने और समझने की क्षमता नहीं होती है। वह बेहोशी की हालत में होता है जिसकी वजह से वह पूछे गए सवालों का घुमा-फिरा कर उत्तर नहीं दे पाता है। इसके अलावा वह ज्यादा नहीं बोल पाता है और सवालों सा ज्यादातर सही और सटीक जवाब देता है। Play Quiz: सवालों के जवाब देकर यहाँ जीतें हज़ारों रुपये

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नार्को टेस्ट के लिए व्यक्ति को यह दवा देने से पहले उसका अच्छे से शारीरिक परीक्षण किया जाता है। उसकी उम्र, सेहत और लिंग के आधार पर ही उसे यह दवा दी जाती है। हालांकि यह टेस्ट खतरे से खाली भी नहीं है क्योंकि नार्को टेस्ट के दौरान यदि व्यक्ति को अधिक मात्रा में दवा दे दी जाए तो वह कोमा में भी जा सकता है और उसकी मौत होने की भी संभावना हो सकती है।

वैसे तो यह माना जाता है कि नार्को टेस्ट में व्यक्ति सबकुछ सच बता देता है लेकिन कभी-कभी बेहोशी के हालत में भी वह व्यक्ति झूठ बोल सकता है और सवाल पूछने वाले को गुमराह कर सकता है।

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