टैरेस गार्डनिंग करने के जरूरी टिप्स

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गार्डनिंग के लिए जरूरी उपकरण

छत पर गार्डनिंग के लिए वॉटरप्रूक टैरेस बनवायी जा सकती है, इससे छत से लीकेज की आशंका नहीं होती है। बजट कम हो, पॉट और कंटेनर्स में बागवानी करें। इसकी संख्या काफी अधिक हो, तो टैरेस पर प्लास्टिक शीट बिछा कर ही गमलों को रखें। इससे गमलों से रिसनेवाला पानी छत के सीधे संपर्क में नहीं आएगा।

सूरज की रोशनी कितनी : बागवानीवाले हिस्से में दिन में कम-से-कम 4 से 6 घंटे सूरज की रोशनी आनी चाहिए। कुछ प्रदेशों या मौसम में किसी-किसी महीने में सूरज की रोशनी काफी तेज रहती है, इससे कई बार नाजुक पौधे झुलस भी जाते हैं। ऐसे में वहां छाया की व्यवस्था की जानी जरूरी है।

कंटेनर कैसा हो

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कोई भी पौधा जिसकी ऊंचाई 5 से 6 फीट हो, आसानी से गमलों या इसी तरह के दूसरे कंटेनर में उगाया जा सकता है। हैंगिंग पॉट्स, विंडो बॉक्स में भी कुछ पौधों को उगाया जा सकता है। ड्रम, कैन, पुराने बरतन जैसे इडली बनाए जानेवाले कंटेनर, चावल बनाने के पुराने बरतन जैसे इडली बनाए जानेवाले कंटेनर, चावल बनाने के पुराने पतीले, बेकार पड़े प्रेशर कुकर का इस्तेमाल भी इस काम के लिए किया जा सकता है। केवल केंटेनर्स की तली में जल निकासी के लिए छेद बना होना चाहिए, छेद नहीं हो, तो खुद बना लें।

गमलों के लिए खाद

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पत्तों की खाद बाहर से खरीद सकते हैं, वरना किचन में बेकार बची चीजों जैसे सब्जियों व फलों के छिलके आदि से भी खाद बना सकते हैं। गमले में डाली जानेवाली मिट्टी अच्छी किरम की होनी चाहिए। गमले तैयार करने में प्रशिक्षित माली की मदद ली जा सकती है। सप्ताह में एक बार गमले में खाद डालें, इससे मिट्टी को पर्याप्त पोषण मिलता रहेगा।

पानी का प्रबंध

पौधों में जरूरत से ज्यादा पानी नहीं डालें, लेकिन नियामित रूप से जरूर डालें। गरामियों में पौधों को दिन में 2 बार पानी की जरूरत होती है। सरदी के दिनों में गमले की मिट्टी को दबा कर नमी का पता कर लें। मिट्टी सूखी महसूस हो, तो ही पानी डालें। मानसून के दिनों में पौधों में ऊपर से पानी नहीं डालें, वरना मिट्टी का सारा पोषण बह जाएगा। दोबारा इसे उपजाऊ बनाने के लिए फिर मेहनत करनी पड़ेगी।

प्लांट प्लानर

गार्डन प्लानर जरूर बनाएं। यह नोट करें कि किस महिने में किस बिज की बुआई करें। पूरे साल की प्लानिंग कर लें। इस बात का खास ख्याल रखें कि वेजिटेबल गार्डनिंग का लाभ मिलने में यानी सब्जियों की पैदावार में समय लगेगा। माली से पूछ कर अपनी छ्त पर ऐसी सब्जियों के पौधे लगाएं, जो आकार में छोटे होने के बावजूद ठीकठाक फल देते हैं ।

कीटों से कैसे बचें

कीटों से निबटने के लिए केमिकल कीटनाशकों की जगह पर ऑर्गेनिक कीटनाशकों की मदद लें। चिली और गार्लिक के ऑगेनिक स्प्रे काफी लाभकारी साबित होंगे। तंबाकू, प्याज, गार्लिक या चिली कॉनकॉक्शन से भी कीटों को पौधों से दूर रखा जा सकता है। कीड़ों से फ्रभावित पत्तों को हटा दें। पौधों के बीच गुलदाऊदी और गेंदा उगा कर भी कीटों को पास फटकने से रोका जा सकता है।

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