चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से किया सवाल एक दिन में नियुक्ति कैसे करें?

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चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में पारदर्शिता की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुनवाई के चौथे दिन सरकार को सुप्रीम कोर्ट के कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति संबंधी फाइल कोर्ट में पेश की. कोर्ट ने फाइल देखने के बाद सरकार द्वारा इस नियुक्ति में दिखाई गई जल्दबाजी पर सवाल उठाया।

पूरी प्रक्रिया महज 24 घंटे में पूरी हो गई

संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि 18 नवंबर को हम इस मुद्दे पर सुनवाई कर रहे थे, उसी दिन फाइल नियुक्ति के लिए भेजी गई और उसी दिन पीएम ने नाम को मंजूरी दे दी. ऐसी जल्दबाजी की क्या जरूरत थी?

पीठ के एक अन्य सदस्य जस्टिस अजय रस्तोगी ने भी सवाल किया कि चुनाव आयुक्त का पद 15 मई से खाली पड़ा है. आप बताएं कि 15 मई से 18 नवंबर के बीच क्या हुआ। नाम जमा करने से लेकर उसके अनुमोदन तक की पूरी प्रक्रिया 24 घंटे के भीतर पूरी कर ली गई।

चार नाम कैसे चुने गए?

सुप्रीम कोर्ट ने कानून मंत्रालय द्वारा सिफारिश के लिए चार नामों के चयन और पद पर नियुक्ति के लिए एक नाम (अरुण गोयल) के चयन पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि आप हमें बताएं कि कानून मंत्रालय ने इन 4 नामों को ही क्यों चुना। सवाल यह भी है कि आपने चयन सूची को इन्हीं 4 लोगों तक सीमित क्यों रखा है। इसके अलावा और भी कई वरिष्ठ नौकरशाह हैं।

एजी का जवाब

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इन नामों को शॉर्टलिस्ट करने के कई कारण हैं, जैसे अधिकारियों की वरिष्ठता, सेवानिवृत्ति और चुनाव आयोग में उनका कार्यकाल। इस प्रक्रिया में भी कुछ गलत नहीं हुआ। पहले भी 12 से 24 घंटे के भीतर अप्वाइंटमेंट लिया जाता था।ये चार नाम भी डीओपीटी के डेटाबेस से लिए गए थे। यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।

6 साल का कार्यकाल भी नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि इन 4 में से भी आपने ऐसे लोगों के नाम चुने हैं जिन्हें चुनाव आयुक्त के रूप में 6 साल भी नहीं मिलेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि आप इस तरह से कार्य करेंगे कि आप वैधानिक आवश्यकताओं का अनुपालन करते हैं। आपको उन लोगों का चयन करना चाहिए जिन्हें आयोग में 6 साल का कार्यकाल मिलता है। अगर आप इस बात पर अड़े हैं कि किसी भी चुनाव आयुक्त को पूरा कार्यकाल नहीं मिलना चाहिए, तो आप कानून के खिलाफ हैं।

क्यों चुना गया अरुण गोयल का नाम?

कोर्ट ने सवाल किया कि सिफारिश में भेजे गए चार नामों में से किस आधार पर सिर्फ एक नाम का चयन किया गया। हमें किसी से (अरुण गोयल) कोई दिक्कत नहीं है। उनका एक उत्कृष्ट अकादमिक रिकॉर्ड रहा है। हमारी चिंता नियुक्ति की प्रक्रिया/आधार को लेकर है। एक व्यक्ति जो दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाला था। आपने इन चारों में सबसे छोटे को किस आधार पर चुना?

एजी की आपत्ति – कोर्ट का जवाब

सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा कि सवाल यह है कि क्या कार्यपालिका के हर छोटे से छोटे काम की समीक्षा की जाएगी. हर कदम पर संदेह किया तो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और गरिमा पर असर पड़ेगा। इससे आयोग के प्रति लोगों की धारणा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जस्टिस जोसेफ ने तब अटॉर्नी जनरल से कहा था कि किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि हमने मन बना लिया है या आपके खिलाफ हैं. हम यहां केवल चर्चा और बहस कर रहे हैं।

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