इन तीन क्रिकेटर्स की लाइफस्टाइल और तेवर ले डूबी इनका करियर

70

क्रिकेट। अमूमन भाग्य होने पर सफलता तो मिल जाती है लेकिन उस सफलता के सुख को भोगने के लिए दूसरे भाग्य की भी जरूरत होती है जिसके बिना सफलता बेस्वाद और बेमजा हो जाती है। हाल में भारतीय क्रिकेट में विनोद कांबली, करूण नायर और एस. श्रीसंत तीन ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जो सौभाग्यवश सफल तो हुए लेकिन उस सफलता को भोगने का भाग्य ना होने के कारण गुमनामी के अंधेरे में गुम हो गए। आज तक के हालात को देखते हुए तो करूण नायर भी इसी श्रेणी में माने जाएंगे। टेस्ट मैचों में तिहरा शतक लगाते ही करूण नायर भी इसी तरह अपने बदले हुए व्यवहार, नए तेवर और साथी खिलाड़ियों के साथ बदले संबंधों के शिकार बन गए।

भारतीय क्रिकेट में तिहरा शतक लगानेवाला दूसरा खिलाड़ी होने का अहसास वे दूसरों को इस कदर करवाने लगे कि कप्तान, टीम के खिलाड़ी के अलावा क्रिकेट संघ के पदाधिकारी भी उनसे दूर होने लगे। बैट स्पॉन्सर से जब उन्होंने अनुबंध तोड़कर उसे सौ गुना अधिक कीमत पर करने की बात कही तो सभी उनसे दूर हो गए। आज वे दो राहे पर हैं।

2013 में मैच फिक्सिंग के आरोपों का दोषी करार दिए जाने पर बीसीसीआई ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाकर सारे अधिकृत क्रिकेटीय संबंध तोड़ लिए। इसके बाद तो उनके दोस्तों, शुभचिंतकों, प्रायोजकों और आयोजकों ने उनसे किनारा कर लिया लेकिन श्रीसंत ने तब भी सबक नहीं सीखा और अपने वैभवशाली जीवन की शैली दिखाना जारी रखा। इसी साल उन्होंने राजस्थान के राजघराने से संबंध रखनेवाली राजकुमारी भुवनेश्वरी कुमारी शेखावत से विवाह रचाया और उनकी एक बेटी भी हुई। दिखावे और तड़क-भडक जीवन के शौकीन श्रीसंत ने अभी कुछ दिनों पहले ही उन्होंने विश्व की सबसे महंगी कारों में शुमार जगुआर को भी अपने दर्जनों कारों के काफिले में शामिल किया।

Advertisement

पॉप गानों के शौकीन श्रीसंत ने अल्बम निकाला और शीघ्र ही फिल्मों में भी काम करना शुरू किया। वहां पर भी उनके स्टार नखरों के कारण फिल्मवालों ने उनसे किनारा कर लिया है। शांताकुमारन श्रीसंत धूमकेतू की तरह भारतीय क्रिकेट पर छाए थे। लोकप्रियता और धन-वैभव के शिखर पर पहुंचकर श्रीसंत सफल हुए तो उनमें घमंड, गर्व और राह से भटकने के ‘गुण’ भी आ गए जो अंतत: उनके पतन का कारण बने। 2013 में स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगने से पहले भी श्रीसंत अपने आक्रामक और हमलावर रवैये के कारण विपक्षी और खुद के टीम के खिलाड़ियों की नजर से उतर चुके थे। हरभजन सिंह द्वारा खुले आम झापड़ रसीद किए जाने से पहले वे एंड्रू साइमंड्स के साथ उलझकर दौरे को रद्द किए जाने के कगार पर पहुंचा चुके थे। बार-बार अपील किए जाने और अंपायर के फैसले के खिलाफ जाने के कारण आईसीसी ने श्रीसंत को कई बार दंडित भी किया। लेकिन वे नहीं माने और अपने इस व्यवहार को अपनी यूएसपी मान बैठे थे।

सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली एक कक्षा, एक स्कूल, एक टीम और एक कोच के तले होने के बावजूद एक साथ भारत के लिए नहीं खेल पाए। ग्लैमर, तड़क-भड़क और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण वे सफलता को पचा नहीं पाए और विवाह से लेकर बयान तक हमेशा विवादों में रहे। शुरुआती 7 टेस्ट में दो दोहरे शतकों के साथ कुल चार शतक लगानेवाले विनोद का टेस्ट में 54 और प्रथम श्रेणी में 60 से अधिक का औसत होने के काबवजूद टीम से बाहर रहना पड़ा।

21 साल की उम्र में पहला टेस्ट खेलनेवाले विनोद केवल 14 टेस्ट ही खेल पाए और 23 की उम्र में आख़िरी टेस्ट खेलने के बाद उनका वापसी का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया। मैं खुद गवाह रहा हूं कि वे किस तरह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर रात एक बजे नशे में धुत होकर होटल वापस लौटे थे। अगले दिन पहली ही गेंद पर वे बोल्ड हुए थे। विनोद का नाम हमेशा विवादों से जुड़ा रहा और वही उन्हें सफलता से दूर कर गया।

अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो तो हमारा फेसबुक पेज यह हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें! हिंदी भाषा को प्रमोट करें!

सभी ख़बरें अपने मोबाइल में पढ़ने के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करे sabkuchgyan एंड्राइड ऐप- Download Now

Advertisement