सीता नहीं बल्कि रावण की पत्नी ही उसकी मौत का बड़ा कारण थी, जानिए कैसे ?

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रामायण काल में पूरे संसार पर मात्र रावण का ही डंका बजता था क्योंकि वह था भी इतना शक्तिशाली यह बात श्री राम के जन्म से पहले की जब कोई राजा रावण का सामना नहीं कर सकता था। रावण को मनुष्य एवं देवताओं से बड़ा भी था इसलिए सर्व प्रथम उसने महादेव की घोर तपस्या करके सर्व तरह के शक्तिशाली हथियार प्राप्त कर लिए थे. वरदान मिलने के बाद रावण को किसी भी चीज़ का भय नहीं रहा क्योंकि मौत आसानी से हो ही नहीं सकती थी वहीं दूसरी ओर उसके पास विशाल एवं ताकतवर सेना मौजूद थी।

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मनुष्य हो अथवा राक्षस लेकिन मृत्यु एक दिन सभी को खा जाती है रावण ने अमर होने के लिए दोनों भाई विभीषण और कुम्भकरण के साथ मिलकर वर्षों तक तपस्या की, जिससे बह्रम देव प्रसन्न हुए। रावण स्वयं को अमर बनाना चाहता था लेकिन बह्रमा जानते थे कि यदि यह अमर हो गया तो समस्त संसार का नाश कर देगा इसलिए उन्होंने रावण के प्राणों को उसकी नाभी के भीतर स्थापित कर दिया और एक तीर दिया जिससे उसकी मृत्यु हो सकती है।

उस तीर को रावण ने लंका के दरबार के सिंहासन के सामने भीम(पिलर) के अंदर छिपा दिया था यह बात विभीषण और रावण की पत्नी मंदोदरी अच्छे से जानते थे। अब रावण पूरी तरह से निश्चित हो चुका था, अहंकार के वश में खुद को संसार का ईश्वर समझने लग गया था सीता हरण के बाद रावण को उसके भाई विभीषण ने समझाते हुए कहा कि वह माता सीता को श्री राम के पास भेज दे। यह सुनकर रावण का अभिमान जाग गया और उसने अपने ही भाई को राज्य से बहार निकाल दिया था।

विभीषण की मुलाक़ात हनुमान जी से हुई और हनुमान के द्वारा ही वह श्री राम के भक्त बन गए थे, युद्ध के समय श्री राम ने रावण पर कई बार प्रहार किये परन्तु वह मर कर वापस जीवित हो जाता था, तब श्री राम को विभीषण ने बताया कि उसे बह्रमा से वरदान में तीर प्राप्त हुआ है उसी तीर से इसकी मृत्यु हो सकती है। विभीषण के इतना कहने पर हनुमान जी ने बिना किसी देरी के शुष्म रूप धरकर लंका में प्रवेश किया लेकिन तीर कहा छिपाया गया है इसकी जानकारी मात्र रावण की पत्नी मंदोदरी को थी।

हनुमान जी ने बाह्रमण का रूप धर के मंदोदरी के मुँह से यह राज खुलवा दिया और उस भीम को तोड़कर तुरंत श्री राम के पास पहुँचे और जब उस तीर से रावण की मृत्यु हुई थी। यदि मंदोदरी वह राज ना खोलती तो रावण की मौत कभी ना हो पाती, यदि आपको ऐसी अनसुनी पौराणिक कथा पढ़ना पसंद है तो नीचे दिया गया फॉलो एवं लाइक बटन अवश्य दबाए।

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