बच्चों को डराना हो सकता है खतरनाक

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बच्चों को डराना किसी भी हालात में सही नहीं है। अगर वह शरारती ज्यादा है, बहुत रोता हो, या खाना न खाता हो, या किसी का भी कहना न मानता हो, या तो बहुत जिद्दी हो। तो उसको भूत, पिशाच, चुड़ैल के नाम से डराना नहीं चाहिए। क्योंकि इन चीजों के नाम लेने या अन्य प्रकार के डर दिखाने से कभी-कभी बच्चा ऐसा डर जाता है। कि वे हमेशा के लिए डरपोक बन जाते है। बचपन का डर उनके दिल में फिर कभी नहीं निकलता। यहां तक कि कभी उन्ही बातों के सपने से वह युवावस्था में भी डर जाते हैं। उनका दिल निर्बल हो जाने से वह सपने में भी वे ही बातें देख कर सोते-सोते रो उठते हैं। यहां तक कि डर के वजह से कभी-कभी बिस्तर में ही मल-मूत्र कर देते हैं।

यदि बच्चा किसी प्रकार से डर गया हो तो उस हालात में उससे कभी कड़वे शब्द न कहे, न किसी प्रकार की धमकी दें। किन्तु मीठे और प्यार के शब्दों से उसे समझा दें। जो बच्चा सोते-सोते चौंक जाता हो तो उसे रात में अकेला कभी न छोड़े और न ही अंधेरे में रखें। हमेशा सोते समय एक मध्यम सी लाईट जला कर रखें। जिससे बच्चे की अांख खुलने पर उसे अंधेरा न दिखाई दे। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों में बच्चे का डर निकल जायेगा।

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