वैष्णो देवी मंदिर की कहानी क्या है, क्यों भैरव को माना जाता है जानिए

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वैष्णो देवी मंदिर एक पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है। ये मंदिर वैष्णो देवी की शक्ति को समर्पित है। वैष्णो देवी मंदिर जम्मू और कश्मीर की पहाड़ियों में स्थित है। वैष्णो देवी को माता रानी और वैष्णवी भी बोला जाता है। वैष्णो देवी मंदिर उत्तरी भारत में पूजा की सबसे प्रतिष्ठित जगहों में से एक है।

What is the story of Vaishno Devi Temple, why Bhairav ​​is considered

यह मंदिर 5200 फुट की ऊँचाई पर है और कटरा से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है। हर वर्ष इस लाखों तीर्थयात्री इस मंदिर के दर्शन करते है। ये धार्मिक स्थल तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद सबसे दौरा किया जाने वाला मंदिर है।

कौन थे रत्नाकर सागर

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इस मंदिर की रखवाली वैष्णो देवी मंदिर बोर्ड रखता है। हिंदू महाकाव्य के अनुसार माँ वैष्णो देवी ने रत्नाकर सागर के घर दक्षिण भारत में जन्म लिया था। उनके सांसारिक माता पिता को एक लंबे समय तक कोई संतान नहीं थी। वैष्णो देवी माँ को बचपन में त्रिकुटा कहा जाता था। बाद में भगवान विष्णु के वंश में जन्म लेने पर उनका नाम वैष्णवी रखा गया।

श्रीधर के घर रूप बदल कर आई थी माता

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समय के साथ देवी माँ की कई कहानियाँ उभर कर सामने आई। वैष्णो देवी माँ का श्रीधर नाम का एक उत्साही भक्त था। एक बार श्रीधर को माँ ने जवान लड़की के रूप में दर्शन दिए और उससे भंडारा करवाने के लिए कहा और साथ ही गांव के सारे पंडित और लोगों को आमंत्रित करने के लिए भी कहा। वैष्णो माता ने श्रीधर को एक स्वार्थी दानव भैरव नाथ को आमंत्रित करने के लिए भी कहा था। जब श्रीधर ने भैरव नाथ को आमंत्रित किया तो भैरव नाथ ने बोला कि अगर वो भंडारे का आयोजन ठीक तरह से नहीं कर सकेगा तो उसका परिणाम बहुत बुरा होगा।

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माता की कृपा से भंडारा बहुत शांतिपूर्वक हुआ पर भैरव नाथ ने कहाँ कि छोटी कन्या में ज़रूर कोई जादुई शक्ति है। भैरव नाथ सच्चाई जानने के लिए माँ का पीछा करते है। करीब नौ महीने तक भैरव नाथ माँ वैष्णो देवी को ढूंढते रहते है। भैरव से पीछा छुड़ाते हुए देवी ने अपने बाढ़ से पृथ्वी पर छोड़ा जहाँ पानी निकल आया और इसे बाढ़गंगा के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि जो मनुष्य इस बाढ़गंगा में नहाता है उसके सारे पाप धुल जाते है।

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गर्भ जून में माता ने करीब नौ महीने तक ध्यान किया और सिद्धियां प्राप्त की। उनके ध्यान को तोड़ते हुए भैरव नाथ ने माता को परेशान किया और जब भैरव ने माँ को मारने की कोशिश की तो माँ को मजबूरन महा काली का रूप धारण करना पड़ा। देवी ने अपने सरासर बल के साथ भैरव को धक्का दिया कि भैरव की खोपड़ी भैरव घाटी, जो पवित्र गुफा से 2.5 किलोमीटर दूर है, पर लाकर गिर गई। मरने के क्षणों में भैरव ने माता से माफी मांगी। देवी को पता था कि भैरव ने ये सब मोक्ष प्राप्त करने के लिए किया था।

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देवी ने न सिर्फ भैरव नाथ को जन्म मृत्यु से निजात दी बल्कि उन्हें एक वरदान दिया कि पवित्र गुफा में दर्शन करने के बाद अगर भक्त भैरव नाथ मंदिर में माथा नहीं टेकेगा तो उसकी यात्रा पूरी नहीं होगी।
तभी से हर साल करोड़ो श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के बाद भैरव नाथ के दर्शन करके अपनी यात्रा पूरी करते है।

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