क्या है मधुमेह आइये जाने

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जब रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होती है, तो उसे मधुमेह रोग कहते हैं। खाली पेट होने पर रक्त में सामान्य तौर पर शर्करा का स्तर 110 मिग्रा से कम और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के दो घंटे बाद 140 मिग्रा से कम हो तो यह सामान्य होता है। लेकिन मधुमेह की स्थिति में खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर 126 और 75 ग्राम ग्लूकोज पीने के 2 घंटे बाद 200 मिग्रा से अधिक होता है।

मधुमेह के मुख्य लक्षण

  • थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता।
  • पैर का घाव ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना।
  • अधिक पेशाब और भूख लगना।
  • तेजी से वजन गिरना।
  • बार-बार चश्मे का नंबर बदलना।
  • जननांगों में खुजली और संक्रमण होना।
  • हृदय आघात, मस्तिष्क आघात का होना।
  • जरूरी नहीं प्रतिदिन इंसुलिन का इंजेक्शन

डायबिटीज के मरीजों को अब अपनी शुगर (रक्त शर्करा) को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का इंजेक्शन बार-बार नहीं लगाना पड़ेगा। इंसुलिन पंप से उनकी यह समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। डायबिटोलोजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा ने बताया कि कई बच्चों को डायबिटीज की बीमारी जन्म से ही सौगात में मिलती है। इन बच्चों को रोज-रोज इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाना काफी कष्टप्रद होता है। इन बच्चों को इंजेक्शन से निजात दिलाने के लिए इंसुलिन पंप एक कारगर उपाय है। इंसुलिन पंप बच्चों के साथ हर उम्र के लोग लगवा सकते हैं।

क्या है इंसुलिन पंप

डॉ. शर्मा के अनुसार इंसुलिन पंप एक पेजर के आकार का उपकरण है। इसमें एक इंसुलिन वायल फिट हो जाता है। यह उपकरण एक पतली नीडिल और इंफ्यूजन सेट के माध्यम से शरीर से जुड़ा रहता है। यह पंप शरीर के लिए आवश्यक इंसुलिन रक्त में मिलाता रहता है। इसके लिए अलग से इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने की जरूरत नहीं होती। इसकी खास बात यह है कि यह शरीर में बनने वाले इंसुलिन की तरह ही प्राकृतिक इंसुलिन की सप्लाई करता

मधुमेह के शुरूआती लक्षण

मधुमेह के शुरूआती लक्षणों की पहचान अगर हो जाए तो इसका इलाज बहुत ही जल्दी और आसानी से हो सकता है। आजकल मधुमेह एक आम समस्या बन गई है। कई लोगों में यह बीमारी शुरू में हो जाती है लेकिन, उनको इस बात का पता नहीं चल पाता है जिसके कारण यह बीमारी बहुत ही खतरनाक हो जाती है। दरअसल डायबिटीज लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब शरीर में पैंक्रियाज नामक ग्रंथि इंसुलिन बनाना बंद कर देती है तब मधुमेह की समस्या होती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद करता है। आइए हम आपको बताते हैं कि मधुमेह के शुरूआती लक्षण क्या हैं।

थकान महसूस होना –

डायबिटीज होने पर इसके शुरुआती दिनों में आपको सारा दिन थकान महसूस होगी। हर रोज भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर में थकान सी महसूस होगी। इससे यह पता चलता है की खून में शुगर का लेवल लगातार बढ़ रहा है।

लगातार पेशाब लगना –

मधुमेह होने पर बार-बार पेशाब आने लगता है। जब शरीर में ज्यादा मात्रा में शुगर इकट्ठा हो जाता है तो यह पेशाब के रास्ते से बाहर निकलता है, जिसके कारण मधुमेह रोगी को बार-बार पेशाब लगने की शिकायत शुरू हो जाती है।
अत्यधिक प्यास लगना – मधुमेह रोगी को बार-बार प्या स लगती है। चूंकि पेशाब के रास्ते से शरीर का पानी और शुगर बाहर निकल जाता है जिसके कारण हमेशा प्यास लगने जैसी स्थिति बनी रहती है। लोग अक्सर इस बात को हल्के में ले लेते हैं और समझ ही नहीं पाते कि उनकी बीमारी की शुरुआत अब हो चुकी है।

आंखें कमज़ोर होना-

मधुमेह रोग की शुरूआत में आंखों पर काफी प्रभाव पडता है। डायबिटीज के मरीज में रोग की शुरूआत में ही आंखों की रोशनी कम होने लगती है और धुंधला दिखाई पडने लगता है। किसी भी वस्तु को देखने के लिए उसे आंखों पर ज़ोर डालना पडता है।

अचानक वज़न कम होना –

मधुमेह रोग की शुरूआत में ही अचानक वज़न तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा आदमी का वजन एकाएक कम होने लगता है।

जोर से भूख लगना –

डायबिटीज के मरीज का वजन तो कम होता है लेकिन भूख में बढोतरी भी होती है। अन्य दिनों की अपेक्षा आदमी की भूख कई गुना बढ जाती है। बार-बार खाना खाने की इच्छा होती है।
घाव का जल्दी न भरना –

अगर आपके शरीर में चोट या कहीं घाव लग जाए और यह जल्दी ना भरे, चाहे कोई छोटी सी खरोंच क्यों ना हो, वह धीरे-धीरे बडे़ घाव में बदल जाएगी और उसमें संक्रमण के लक्षण साफ-साफ दिखाई देने लगेंगे।

तबियत खराब रहना –

डायबिटीज मरीज के शरीर में किसी भी तरह का संक्रमण जल्दी से ठीक नही होता है। अगर आपको वायरल, खॉसी-जुकाम या कोई भी बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाए तो आपको राहत नहीं मिलेगी। छोटे-छोटे संक्रमण जो आसानी से खुद ठीक हो जाते हैं बढे घाव बन जाते हैं।
त्वचा के रोग होना –

मधुमेह की शुरूआत में त्वचा संबंधी कई रोग होने शुरू हो जाते हैं। त्वचा के सामान्य संक्रमण बडे घाव बन जाते हैं।

आनुवंशिक कारण –

आपके परिवार में किसी अन्य सदस्य को भी मधुमेह की समस्या रही हो तब भी आपको सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है।
हालांकि डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अपने डॉक्टर से सलाह लें और समय-समय पर शुगर लेवल का चेकअप करवाते रहें।

मधुमेह के शुरूआती लक्षणों की पहचान अगर हो जाए तो इसका इलाज बहुत ही जल्दी और आसानी से हो सकता है। आजकल मधुमेह एक आम समस्या बन गई है। कई लोगों में यह बीमारी शुरू में हो जाती है लेकिन, उनको इस बात का पता नहीं चल पाता है जिसके कारण यह बीमारी बहुत ही खतरनाक हो जाती है। दरअसल डायबिटीज लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब शरीर में पैंक्रियाज नामक ग्रंथि इंसुलिन बनाना बंद कर देती है तब मधुमेह की समस्या होती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को नियंत्रित करने में मदद करता है। आइए हम आपको बताते हैं कि मधुमेह के शुरूआती लक्षण क्या हैं।

मधुमेह दमन चूर्ण- दौड़-धूप भरी दिनचर्या, मानिसक तनाव का दबाव, अनुचित और अनियमित ढंग से आहार-विहार करना, शारीरिक व्यायाम, खेलकूद या योगासन आदि न करना आदि कारणों के अलावा कुछ अज्ञात कारण भी हैं जो मधुमेह यानी डायबिटीज रोग पैदा करते है। वंशानुगत कारण से भी यह रोग पैदा होता है। रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होना और मूत्र में शर्करा होना ‘मधुमेह’ रोग होना होता है। यहाँ मधुमेह रोग को नियन्त्रित करने वाली परीक्षित और प्रभावकारी घरेलू चिकित्सा में सेवन किए जाने योग्य आयुर्वेदिक योग ‘मधुमेह दमन चूर्ण’ का परिचय प्रस्तुत किया जा रहा है।

घटक द्रव्य – नीम के सूखे पत्ते 20 ग्राम, ग़ुडमार 80 ग्राम, बिनोले की मींगी 40 ग्राम, जामुन की गुठलियों की मींगी 40 ग्राम, बेल के सूखे पत्ते 60 ग्राम।

निर्माण विधि – सब द्रव्यों को खूब कूट-पीसकर मिला लें और इस मिश्रण को 3 बार छानकर एक जान कर लें। छानकर शीशी में भर लें।

मात्रा और सेवन विधि – आधा-आधा चम्मच चूर्ण, ठण्डे पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

लाभ – यह योग मूत्र और रक्त में शर्करा को नियन्त्रित करता है। इसका प्रभाव अग्न्याशय और यकृत के विकारों को नष्ट कर देता है। इसका सेवन कर मधुमेह रोग को नियन्त्रित किया जा सकता है। इसके साथ वसन्त कुसुमाकर रस की 1 गोली प्रतिदिन लेने से यह रोग निश्चित रूप से नियन्त्रित रहता है। यह योग इसी नाम से बाजार में मिलता है।

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