सौ वर्ष जियेँ तो करें यह नियम

0 17

पेट का हमेशा भारी रहना, भूख का नहीं लगना यह बताता है।

की आपका पेट साफ नहीं रहता है। एसा भोजन के न पचने के कारण होता है। चरक के अनुसार भूख न लगी हो फिर भी भोजन करने से रोग होते हें। इसीलिए जब भोजन करें तो बिना भूख के न करें।

ऐसी अवस्था में यह जानना भी जरूरी है की, उड़द, चना आदि से बने पदार्थ भारी होते हैं, जिन्हें कम मात्रा में लेना ही उपयुक्त रहता है। खाने के साथ अदरक और सेंधा नमक का सेवन सदा हितकारी होता है। भोजन ताजा होना चाहिए। ताजा गरम भोजन न केवल स्वादिष्ट लगता है,वरन पाचकाग्नि को तेज करता है और शीघ्र पच जाता है। ताजा भोजन अतिरिक्त वायु और कफ बढ्ने नही देता। ठंडा बासी या सूखा भोजन देर से पचता है। इससे गैस अधिक बनती है। एक बार खाना खाने के बाद जब तक वह पूरी तरह पच न जाए एवं खुलकर भूख न लगे तब तक दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए। इस लिए यह भी जरूरी है की भोजन उतनी ही मात्रा में किया जाए जो आसानी से पचाया जा सके। खाये जाने वाले भोजन में ठोस ओर तरलता का अनुपात 70:30 होना अधिक लाभकारी है। अधिक सूखे खाद्य खाते समय पानी अधिक पीकर या अन्य तरल खाद्य से इस अनुपात को नियंत्रित करना चाहिए। एक बार भोजन करने के बाद दूसरी बार भोजन करने के बीच कम-से-कम छ: घंटों का अंतर अवश्य रखना चाहिए ।

रात्रि में आहार के पाचन के समय अधिक लगता है इसीलिए रात्रि के समय जल्दी भोजन कर लेना चाहिए। शीत ऋतु में रातें लम्बी होने के कारण सुबह जल्दी भोजन कर लेना चाहिए और गर्मियों में दिन लम्बे होने के कारण सायंकाल का भोजन जल्दी कर लेना उचित है। भोजन की बाद कम से कम तीन घंटे तक नहीं सोएँ। भोजन की बाद जल्दी सो जाने से शारीरिक गतिविधियां मंद पड जातीं हें, पाचन धीरे- धीरे होता है, तीन घंटे जागते रहने से पेट का खाना पच कर आगे बढ़ जाता है, इससे अपचन नही होता।

वजन को नियंत्रित करना है तो
1-धीरे- धीरे चबा- चबाकर खाओ।
2-शांति से एकाग्र चित्त होकर भोजन करो।
3-छोटे छोटे कोर(निवाले) खाओ।
4-सोचो की भोजन में बड़ा स्वाद लग रहा है।

संतुलित आहार जिसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट ओर फाइबर सहित कम स्टार्च वाला भोजन जिसमें यथेष्ट श्रेष्ठ तरलता हो , अपनी आयु, प्रकृति, के अनुसार उचित मात्रा में करना चाहिए। मनुष्य प्रजाति के लिए हमेशा शाकाहारी भोजन ही सात्म्य या उपयुक्त होता है। आमिष या नॉन वेज के लिए मनुष्य शरीर नहीं बना है। ऐसा खाना इसी कारण शरीर जल्दी बाहर फेंक देता है। खाने की मात्रा व्यक्ति की पाचकाग्नि और शारीरिक बल के अनुसार निर्धारित होती है।

हल्के पदार्थ जैसे कि चावल, मूंग, दूध अधिक मात्रा में ग्रहण कर सकते हैं।

Sab Kuch Gyan से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…

loading...

loading...

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.