सिकन्दर की यें 3 इच्छाएं, मरते दम तक नही भुलाई जा सकती है

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महान सम्राट सिकन्दर को कौन नही जानता। यह वह शख्स था जो जन्म से ही बुद्धिमान और बहादुर था। ऐसा कहा जाता है कि सिकन्दर ने अपनी किस्मत खुद ही लिखा था। पिता की मृत्यु के बाद सिकंदर को ग्रीक का राजा बनाया गया था। लेकिन सिकंदर पूरी दुनिया पर अधिकार करना चाहता था जिसके लिए उसने कोई कसर नही छोड़ा और बहुत सारे जंग में फतह भी हासिल किया।

सिकन्दर की नजर जिस पे पड़ जाती वो उसे हासिल किए बगैर दम नही लेता था। इतना कुशल और क्रूर शाशक होते हुए भी सिकंदर ने मरते वक्त अपनी 3 इच्छाएं रखी जो कुछ इस प्रकार है और इसे कभी नही भुलाया जा सकता। तो आइये जानते हैं।

  1. जब सिकन्दर कमजोर होकर मरने के कगार पर पहुंच गया तो उसने अपनी पहली शर्त यह रखा कि जिन हकीमों ने उसका इलाज किया है वही उसे जनाजे को कंधा देंगे। सिकन्दर का इशारा इस तरफ था कि इलाज करने वाला हकीम भी किसी को मौत से नही बचा सकता।

  2. सिकन्दर की दूसरी इच्छा यह थी कि उसने कहा कि मरने पर मेरे दौलत को गरीबों में लुटा दिया जाए ताकि लोगों को ये पता चल सके कि दौलत भी मौत को कभी जीत नही सकती। सब यहीं रह जाती है।

  3. सिकंदर की तीसरी इच्छा थी की, जब जनाजा बाहर निकाला जाय तब मेरे दोनों हाथों की हथेली को बाहर रखा जाये, ताकि लोगों को पता चल सके की इंसान खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाना होता है।

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