शिवाजी राजे भोंसले के वंशज आज भी हैं, उनके पास है इतने खरब की संपत्ति और इतना रुतबा भी

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भारत माता के ऐसे तो कई सपूत होंगे पर राजा शहाजीराजे भोसले जैसा सेनापति राजा जैसा राजा भारत में आज तक जन्म नहीं लिया और उन्होंने ऐसे ही भारत की और एक सपूत को जन्म दिया. जिन्होंने भारत देश को उन से मुक्त करवाया जो भारत को लूट रहे थे और भारत को बदनाम कर रहे थे वह तो हमारे प्रिय राजा शहाजीराजे भोसले के पुत्र शिवाजी राजे भोसले जिनको अपनी माता जीजाबाई जान से भी ज्यादा प्यारी थी.

The descendants of Shivaji Raje Bhonsle are still today, they have so many trillion wealth and so much status

शिवाजी राजे भोसले यह उत्तीर्ण राजा थे शिवाजी शहाजी राजे भोसले के पिता एक सेनापति थे जो डेक्कन सल्तनत के लिए काम करते थे शिवाजी की माताजी जीजाबाई सिंदखेड के लखुजीराव जाधव की पुत्री थी . शिवाजी के जन्म के समय डेक्कन की सत्ता तीन इस्लामिक सल्तनतो बीजापुर , अहमदनगर और गोलकोंडा में थी | शाहजी अक्सर अपनी निष्ठा निजामशाही ,आदिलशाह और मुगलों के बीच बदलते रहते थे लेकिन अपनी जागीर हमेशा पुणे ही रखी और उनके साथ उनकी छोटी सेना भी रहती थी.

शिवाजी महाराज अपनी माता से भी अधिक करीब थे और वह बहुत ही धार्मिक ्मिक वातावरण ने शिवाजी पर बहुत गहरा प्रभाव डाला था जिसकी वजह से नेमार हिंदू ग्रंथों रामायण और महाभारत की कहानी अपनी माता से सुनी थी. इन दो ग्रंथो की वजह से वो जीवनपर्यन्त हिन्दू महत्वो का बचाव करते रहे | इसी दौरान शाहजी ने दूसरा विवाह किया और उनकी दुसरी पत्नी तुकाबाई के साथ शाहजी कर्नाटक में आदिलशाह की तरफ से सैन्य अभियानो के लिए चले गये | दादोजी ने शिवाजी को बुनियादी लड़ाई तकनीके जैसे घुड़सवारी, तलवारबाजी और निशानेबाजी सिखाई |

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शिवाजी ने प्रथम बार हिंदवी स्वराज्य की अवधारणा दादाजी नरस प्रभु के समक्ष प्रकट की |फिरंगोजी नरसला ने शिवाजी की स्वामीभक्ति स्वीकार कर ली और शिवाजी ने कोंडाना का किले पर कब्जा कर लिया | कुछ तथ्य बताते है कि शाहजी को 1649 में इस शर्त पर रिहा कर दिया गया!

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शिवाजी और संभाजी कोंड़ना का किला छोड़ देवे लेकिन कुछ तथ्य शाहजी को 1653 से 1655 तक कारावास में बताते है | शाहजी की रिहाई के बाद वो सार्वजनिक जीवन से सेवामुक्त हो गये और शिकार के दौरान 1645 के आस पास उनकी मृत्यु हो गयी | पिता की मौत के बाद शिवाजी ने आक्रमण करते हुए फिर से 1656 में पड़ोसी मराठा मुखिया से जावली का साम्राज्य हथिया लिया |

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वह तो हमारे प्रिय राजा शहाजीराजे भोसले के पुत्र शिवाजी राजे भोसले जिनको अपनी माता जीजाबाई जान से भी ज्यादा प्यारी थी शिवाजी राजे भोसले यह उत्तीर्ण राजा थे जिन्होंने बचपन से ही ऐसी शस्त्र विद्या सीखी थी जिसे शस्त्र विद्या में इन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता था और उनके पिता का कहना था कि उनको मात्र बचपन की आयु में ही बड़े-बड़े योद्धाओं के साथ विद्या सीखना था और उनकी या कला एक दिन भारत के लिए कारगर साबित हुए और उन्होंने भारत देश को सुल्तानों से आजाद करवाया ऐसे तो बहुत पीढिंया निकल जाती है पर आज के युग के दौर पर अगर शिवाजी राजे भोसले क्या थे यह बताने के लिए आज भी उनके वंशज जिंदा है और उनसे ही हमें प्रेरणा मिलती है परंतु आज भी वंशज जिंदा है उनके पास उनकी दी हुई कई खरबों की संपत्ति महलों की संपत्ति और उनकी भी मेहनत से कमाए हुए कई बड़ी-बड़ी महिलाओं राजघरानों की विरासत मिली!

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ऐसे तो शिवाजी राजे भोसले का जन्मदिवस पर विवाद है. लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने 19 फरवरी 1630 को उनका जन्मदिवस स्वीकार किया है | उनकी माता ने उनका नाम भगवान शिवाय के नाम पर शिवाजी रखा जो उनसे स्वस्थ सन्तान के लिए प्रार्थना करती रहती थी |

1659 में आदिलशाह ने एक अनुभवी और दिग्गज सेनापति अफज़ल खान को शिवाजी को तबाह करने के लिए भेजा ताकि वो क्षेत्रीय विद्रोह को कम कर देवे | 10 नवम्बर 1659 को वो दोनों प्रतापगढ़ किले की तलहटी पर एक झोपड़ी में मिले | इस तरह का हुक्मनामा तैयार किया गया था कि दोनों केवल एक तलवार के साथ आयेगे शिवाजी को संडे हुआ कि अफजलखान उन पर हमले की नीति बना कर आए हैं इसलिए शिवाजी ने अपने कपड़ों के नीचे कवच दाई भुजा पर छुपा कर बाया हाथ में कटार के साथ लेकर चले | तथ्यों के अनुसार दोनों में से किसी एक ने पहले वार किया , मराठा इतिहास में अफज़ल खान को विश्वासघाती बताया है जबकि पारसी इतिहास में शिवाजी को विश्वासघाती बताया है | इस लड़ाई में अफज़ल खान की कटार को शिवाजी के कवच में रोक दिया और शिवाजी के हथियार बाग न खेलने अफजल खान पर इतने घातक वाक्य की उनके शरीर में घाव गहरे बने और उनकी मौत हो गई | इसके बाद शिवाजी ने अपने छिपे हुए सैनिको को बीजापुर पर हमला करने के संकेत दिए|

शिवाजी बचपन से ही उत्साही योद्धा थे हालांकि इस वजह से उन्हें केवल औपचारिक शिक्षा दी गयी जिसमे वो लिख पढ़ नही सकते थे लेकिन फिर भी उनको सुनाई गई बातो को उन्हें अच्छी तरह याद रहता था |शिवाजी ने मावल क्षेत्र से अपने विश्वस्त साथियो और सेना को इकट्टा किया |

यह हमारे भारत के महान राजा शिवाजी राजे भोसले के पुत्र शिवाजी राजे भोसले जिन्होंनेअपने देश के लिए ऐसी ऐसी लड़ाई लड़ी है जिसे भारत देश को मुगलों से आजादी मिली और उन्होंने उनकी पीढ़ियों को भी यही संस्कार दिए हैं और उनकी पीढ़ी भी आज भी उसे अच्छे संस्कार से जी रही है शिवाजी राजे भोसले की कई बड़ी संपत्ति का आज भी वारिश है!

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