मजबूरी ऐसी कि मां को अपने ही बेटे को जंजीरों से बांध कर रखना पड़ा

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में जंजीर, पैरों में बेड़ियां कोई मां अपने बेटे को इस हालत में नहीं देखना चाहती ।लेकिन मजबूरी ऐसी कि यह सब मां को ही करना पड़ता है। मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ का है जहां एक मां अपने ही बेटे को जंजीरों से बांध कर रखती है ,बात दरअसल यह है कि बेटे की मानसिक हालत कुछ ठीक नहीं। काफी इलाज कराने के बाद परिवार की आज यह हालत हो गई कि दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती,इतना ही नही मानसिक रूप से कमजोर हो चुका बच्चा घर के बाहर लोगों को नुकसान पहुचाने लगा। घर के बाहर आने जाने वालों पर हमले करने लगा। जब लोगों ने इसकी शिकायत परिवार से की तो मजबूरी मे आकर मां बाप को दिल मजबूत करके अपने बच्चे को घर के अंदर जंजीरों से बांधकर रखना पड़ रहा है।

The compulsion was such that the mother had to tie her own son to the chains

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कहते है औलाद जैसी भी हो, पर मां बाप कभी भी अपनी औलाद को परेशानी मे नही देखना चाहते है। जंजीरों से बांधने के बाद भी मां बाप बेटे को खाने से लेकर पानी और उसकी फरमाईश पूरी कर रहे हैं।मजबूरन एक मां को अपनेे बेटे को जंजीरों और बेड़ियों से बांधकर रखना पड़ता है । बेटा अक्सर जब घर से बाहर चला जाता है ,तो लोग उसे तंबाकू खिलाते हैं ,शराब पिलाते हैं ,यहां तक कि कुछ लोग पत्थरों से भी पीटते हैं ।मजबूरन मां ने बेटे को जंजीरों में बांधना ही उचित समझा। अब इस मां को सरकार से उम्मीद है कि वह अपने बेटे की इलाज के लिए सरकार उसकी सहायता करेगी लेकिन प्रशासन कहां सुध लेने वाला है।

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