मामूली क्लर्क की नौकरी करने वाले कर्नाटक के नये मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बारें में एक क्लिक में जानिए

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कर्नाटक के नये मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के एक बार फिर से सितारे बुलंद हो चुके हैं। लिंगायत समुदाय के येदियुरप्पा का जीवन बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा। सफलता उनको किसी थाली में सजी हुई नहीं मिली। कभी चावल मिल में मामूली क्लर्क की नौकरी करने वाले येदियुरप्पा ने गरीबी में जिन्दगी बिताई। कभी जीवन चलाने के लिए हार्डवेयर की दुकान भी खोली। आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी।

75 साल के हैं येदियुरप्पा, चार साल में मर गई थी मां

बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को कर्नाटक के मांड्या जिले के बुक्कनकेरे में हुआ था। वो इस समय 75 साल के हैं। लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले येदियुरप्पा के पिता सिद्धलिंगप्पा थे। वहीं उनकी मां पुट्टतायम्मा था। जब वो चार साल के थे तभी उनकी मां मर गई थीं। इसके बाद उन्होंने गरीबी में दिन काटे और जैसे-तैसे बीए की पढ़ाई पूरी की।

Biograhy of Yeddyurappa,

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समाज कल्याण विभाग में मिली थी बाबू की नौकरी

राजनेता के तौर पर जाने जाने वाले येदियुरप्पा ने शुरू से राजनेता बनने का सपना तो नहीं देखा था लेकिन उनके सपने बड़े जरूर थे। उनको साल 1965 में समाज कल्याण विभाग में बाबू की नौकरी मिल गई थी। हालांकि उन्होंने वो नौकरी नहीं की और शहर छोड़कर शिकारीपुर चले आये। यहां उन्होंने काम की तलाश में एक चावल मिल में लिपिक की नौकरी करनी शुरू कर दी।

मालिक की बेटी से हो गया था प्यार

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साल 1967 में उन्होंने चावल मिल में नौकरी शुरू कर दी थी। यह चावल मिल वीरभद्र शास्त्री नाम के अमीर इंसान की थी। नौकरी करते-करते ही वीरभद्र की छोटी बेटी मैत्रादेवी को ये दिल ही दिल में चाहने लग गये थे। हालांकि शुरुआत में मैत्रा उनको नहीं पसंद करती थी लेकिन बाद में वो भी इनको दिल दे बैठी। इसके बाद दोनों ने शादी भी कर ली। हालांकि उनकी बीवी की 2004 में कुएं में गिरने से मौत हो चुकी है।

शादी के बाद छोड़ी नौकरी और खोल ली हार्डवेयर की दुकान

येदियुरप्पा ने मैत्रादेवी से शादी की। उनके दो बेटे हैं। बी वाई राघवेंद्र और विजयेंद्र। वहीं तीन बेटियां हैं, जिनके नाम, अरूणादेवी, पद्मावती और उमादेवी हैं। उन्होंने शादी के बाद कुछ अपना करने की ठानी। वो महत्वाकांक्षी तो थे ही, इस वजह से उन्होंने नौकरी छोड़कर हार्डवेयर की दुकान खोल ली और अपना जीवन चलाने लगे। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

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1972 में किया था राजनीति में प्रवेश

येदियुरप्पा ने राजनीति में प्रवेश 1972 में किया जब उनको शिकारीपुरा तालुका के जनसंघ का चेयरमैन चुना गया। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी का सचिव का पद पाने के बाद उनका राजनीति में दबदबा और बढ़ गया। उनका हकीकत में राजनीति का सफर साल 1983 में प्रारम्भ हुआ जब उन्होंने पहली बार विधायकी पायी औऱ शिकारीपुर से विधानसभा में कदम रखा।

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पांच बार शिकारीपुर से चुने गये विधायक

येदियुरप्पा शिकारीपुर विधानसभा सीट में ऐसे छा गये कि लगातार पांच बार तक उनका कोई विकल्प ही नहीं मिला। वो लगातार पांच बार तक वहां से विधायक चुने जाते रहे। उन्होंने भाजपा में अपना राजनीतिक करियर तलाशा था। वो भाजपा के दक्षिण भारत में इकलौता बड़ा चेहरा थे। हालांकि अभी उनको राजनीति में बहुत आगे जाना था।

2007 में पहली बार बने सात दिन के लिए सीएम

साल 2007 में जब कांग्रेस की धरम सिंह नीत गठबंधन सरकार को हटाने की बारी आई तो उन्होंने जनता दल सेक्यूलर के नेता कुमारस्वामी की सहायता की थी। इसके बाद भाजपा-जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई। समझौते के तहत कुमारस्वामी औऱ येदियुरप्पा को बारी-बारी से सीएम पद मिलना था। कुमार ने अपना कार्यकाल तो पूरा कर लिया लेकिन जब येदियुरप्पा 12 नवंबर को सीएम बने तो 19 नवंबर को मंत्रालय के विवाद के बाद अपना समर्थन वापस ले लिया।

साल 2008 में बने भाजपा के सीएम

CHief Minister B S Yaddyurppa his family menbers seen in pic

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक की तस्वीर ही बदल गई। भाजपा को 110 सीटें मिलीं। जबकि कांग्रेस को 80 और जेडीएम को 28 सीटें मिली थीं। पांच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से भाजपा ने वहां सरकार बनाई और येदियुरप्पा ने सीएम का पद संभाला। इसके बाद उनका सफर चल पड़ा

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