इन 6 गंभीर बीमारियों से कैसे बच सकते हो जानिए आप भी

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मुख्य कार्य पाचन का

लिवर का मुख्य कार्य भोजन को पचाना होता है. लिवर में पित्त (बाइल) बनता है. इसमें कई प्रकार के रस होते हैं जिससे भोजन पचता है व शरीर का पीएच लेवल भी अच्छा रहता है. लिवर डीटॉक्सिफिकेशन का कार्य करता है. खानपान व दवाइयों के कारण शरीर में पहुंचने वाले विषैले तत्त्वों को बाहर भी निकालता है. इसके साथ ही संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया व वायरस को भी निष्क्रिय कर हमें सुरक्षित रखता है.

कैसे पहचानें लिवर रोग है?

लिवर के कई रोग होते हैं. अधिकांश बीमारियों के लक्षण भी अलग होते हैं. लेकिन इनके सामान्य व शुरुआती लक्षणों में भूख नहीं लगना, उल्टी होना, कमजोरी, जी मिचलाना व पीलिया जैसी समस्याएं दिखती हैं. समस्या बढ़ने पर पेट में पानी भरना, खून की उल्टी होना, शरीर में सूजन व बेहोशी आना. साथ ही एसिडिटी, अपच व कब्ज की समस्या भी लिवर रोगों में देखने को मिलती है.

क्या हैं कारण?

गलत खानपान, व्यायाम न करना, वायरस व बैक्टीरिया के इंफेक्शन से लिवर रोग होते हैं. कुछ दवाइयों का अधिक प्रयोग, ब्लड ट्रांसफ्यूजन से भी लिवर की बीमारी होती है. अन्य कारण भी हैं.

शराब जितनी खतरनाक बीयर?

बीयर से भी शराब की तरह लिवर को नुकसान होता है. लिवर के गंभीर रोगियों में 60-70 प्रतिशत मरीज किसी न किसी रूप में एल्कोहल लेते हैं या लेते थे. लिवर की समस्या से बचना है तो बीयर/शराब बिल्कुल ही न लें. इनसे दूर रहें.

डायबिटीज रोगी?

डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर की संभावना ज्यादा रहती है. लिवर का कार्य शुगर लेवल अच्छा रखना है. लापरवाही से यह समस्या फैटी स्टेडो हेपेटाइटिस व बाद में लिवर सिरोसिस में बदल जाती है.

कैसे कर सकते हैं बचाव?

लिवर रोगों से बचाव के लिए संक्रमित खाद्य पदार्थ व दूषित पानी से बचें. खाने में पोषक तत्त्व वाली चीजें शामिल करें. खाना समय से खाएं. देर रात को खाने से बचें. इससे लिवर पर पड़ता प्रभाव है. डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें. समस्या है तो घी से बचें. बाहर खाने से बचें. फलों का रस लेने की स्थान सीधे फल ही खाएं.

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