जानिए दुनिया का सबसे बड़ा सच कैसे हुई थी श्री राम जी की मौत, क्या गलती थी हनुमान जी की

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दशरथ पुत्र श्री रामचंद्र को तो आप जानते ही होंगे उन्होंने इस सतयुग में आकर सतयुग के लोगों का जीना पावन कर दिया था साक्षात राम जी विष्णु का स्वरूप थे उन्होंने धरती पर जन्म लेकर सभी मनुष्य का जीवन और बेड़ा पार कर दिया था और यह सार्थक कर दिया था कि भगवान भी देवलोक छोड़कर पृथ्वी लोक पर आ सकते हैं. और दुष्टों का संहार कर सकते हैं. उन्होंने यहां पर कई मनुष्य को और कई जिलों को अपने नशा मुक्ति दिलाई ऐसे पावन पर्व रामजी कीवी पृथ्वी लोक पर मृत्यु हुई है उसे मृत्यु नहीं कह सकते पर एक प्रकार का प्रभु की लीला ही कह सकते है तो आइए हम आपको बताते हैं. कैसे हुई थी भगवान श्री रामचंद्र की मृत्यु की लीला!

राम जी को भी इस दुनिय से जाना पड़ा था. लेकिन राम की नगरी अयोध्या का पहरेदार हनुमान थे इसलिए यमदूतों को अयोध्या महल में आने की इजाजत नहीं थी. यमदूत हनुमान के डर से अयोध्या महल में अन्दर नहीं आ रहे थे कई बार यमदूत ने कोशिश तो की, वह छुपकर राम महल में आयें और भगवान राम से पृथ्वी लोक छोड़कर अब चलने का अनुरोध करें लेकिन हनुमान के चलते यम ऐसा नहीं कर पा रहे थे!

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राम को मालूम चल गया था कि अब पृथ्वी से जाने का समय आ गया है लेकिन हनुमान महल के पहरेदार हैं ऐसे में यमदूत तो यहाँ कदम भी नहीं रख सकते हैं. इसलिए राम ने अपनी लीला दिखाई और एक दिन अपनी एक अंगूठी महल के एक छेद में डाल दी. बाद में हनुमान को बुलाया और राम ने कहा कि हमारी अंगूठी इस छेद में चली गयी है इसको आप लेकर आओ!

यहाँ आने की वजह हनुमान से पता करते हैं. हनुमान बताते हैं कि भगवान राम की अंगूठी यहाँ गिर गयी है जिसे खोजने वह आयें हैं. वासुकी नाग इनको एक ऐसी जगह लेकर जाते हैं जहाँ अंगूठी ही अंगूठी हैं और सभी राम जी की ही लगती हैं. हनुमान को हैरान-परेशान देखकर वासुकी नाग बताते हैं कि समय-समय पर भगवन राम जगत में आते हैं. और जाते समय अपनी अंगूठी यही छोड़ जाते हैं!

तो हनुमान जी समझ जाते हैं कि राम जी ने यह लीला क्यों खेली थी उधर महल हनुमानजी जाते हैं. यमदूत भगवान से चलने का अनुरोध करते हैं और राम जी यहां सत्य जगत को बता देते हैं. कि जीवन में जीव को जगत से जाना है.और जाने का समय आता ही है. और मैं ना किसी रूप में किसी रूप में आता रहूंगा इसके बाद हनुमान जी भी राम नाम में तपस्या ले ली और एक किस्सा गरुण पुराण कहां है. कि वह बोले तो आत्मा मरने के बाद उस रात वापिस आती है!

हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के महान अवतार प्रभु राम के इस दुनिया से चले जाने की कहानी काफी रोचक है। हर एक हिन्दू यह जानना चाहता है. कि आखिरकार हिन्दू धर्म के महान राजा भगवान राम किस तरह से दूसरे लोक में चले गए। वह धरती लोक से विष्णु लोक में कैसे गए इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है।

हिन्दू धर्म के प्रमुख तीन देवता – ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश में से भगवान विष्णु के कई अवतारों ने विभिन्न युग में जन्म लिया। यह अवतार भगवान विष्णु द्वारा संसार की भलाई के लिए लिए गए थे। भगवान विष्णु द्वारा कुल 10 अवतारों की रचना की गई थी, जिसमें से भगवान राम सातवें अवतार माने जाते हैं। यह अवतार भगवान विष्णु के सभी अवतारों में से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और पूजनीय माना जाता है।

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