बहुत सी बीमारियों से दूर रखता है विटामिन बी 12

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डॉं. श्रीकांत शर्मा

कई तरह  के पोषक तत्व मिल कर हमारी सेहत को दुरुस्त रखते हैं, जिनमें विटामिन्स की भी खास भूमिका होती है। विटामिन बी 12 की अगर शरीर में कमी हो जाए तो स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है, आप अचानक थकान महसूस कर सकते हैं, डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। आप अपने शरीर में इस विटामिन को कैसे संतुलित रख सकते हैं, बता रहे हैं मूलचंद मेडिसिटी के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सलाहकार डॉं. श्रीकांत शर्मा

स्वस्थ रहने के लिए हम हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने की कोशिश करते हैं, परन्तु फिर भी कई बार हमारे खानपान में कोई न कोई ऐसी कमी रह ही जाती है, जिससे सेहत संबंधी कई समस्याएं हमें परेशान करने लगती हैं। शरीर को सुचारु रूप से चलाने में विटामिन्स और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स बहुत जरूरी होते हैं, पर विटामिन बी-12 एक ऐसा तत्व है, जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सही से काम करने में मदद करता है। इसकी कमी सेहत के लिए निश्चित रूप से बड़े स्तर पर नुकसानदेह साबित हो सकती है।

क्यों है जरूरी विटामिन बी-12
विटमिन बी-12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत में सहायता करता है। यह ब्रेन, स्पाइनल कोर्ड और नसों के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है। हमारी लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। यह शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है।

कमी के क्या हो सकते हैं कारण

इसका आनुवंशिक कारण भी हो सकता है।
आंतों एवं वजन घटाने की सर्जरी कराना भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है।
क्रोंज्स नामक आंतों की बीमारी, जिस कारण आंतें विटमिन बी-12 का अवशोषण नहीं कर पातीं।
अगर व्यक्ति को लंबे समय तक एनीमिया की समस्या रही हो।
शाकाहारी लोगों में इसकी कमी आम बात हो जाती है, क्योंकि यह विटामिन मुख्यत: एनिमल प्रोडक्ट्स में ज्यादा पाया जाता है।

क्या हैं लक्षण
विटामिन बी-12 की कमी से हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन, जीभ में सूजन, कुछ भी याद रखने में परेशानी, त्वचा का पीला पड़ना, कमजोरी महसूस होना, चलने में कठिनाई, अनावश्यक थकान, डिप्रेशन आदि समस्याएं हो सकती हैं। अगर शरीर में विटमिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो इससे स्पाइनल कोर्ड की नसें नष्ट होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैरालिसिस का भी अटैक हो सकता है।

खानपान में विटामिन बी-12
अक्सर यह सवाल उठता है कि हमें अपने खानपान में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर में विटामिन बी-12 की कमी न हो। हालांकि मांसाहारी पदार्थों में विटामिन बी 12 की भरपूर मात्रा होती है, परन्तु शाकाहारी लोगों को विशेष रूप से अपने भोजन पर ध्यान देना चाहिए। विटामिन बी-12 के कुछ मुख्य स्रेत है। हमें डेरी उत्पादों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए जैसे दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क आदि। इसके अलावा जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी विटामिन बी 12 आंशिक रूप से पाया जाता है।

नॉन वेजिटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकन आदि से विटमिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है, परन्तु इसका ज्यादा सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है, इसलिए नॉनवेज का सेवन सीमित और संतुलित मात्रा में करें।

उपचार
अक्सर देखा जाता है कि लोग विटामिन बी 12 कि कमी के कारण दिखने वाले लक्षणों को मामूली समझ कर नजरअंदाज करते जाते हैं, किन्तु आगे चल कर यह समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है। ऐसे में जरूरी है कि बिना देर किए विटामिन बी-12 की जांच करवाएं। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं आता। 1500 से 2000 रुपए में यह जांच हो जाती है।

दवा की मात्रा मर्ज की गंभीरता पर निर्भर करती है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। यह दवा आंतों में मौजूद लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया को सक्रिय करने का काम करती है। अगर सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए तो दवाओं और स्वस्थ खानपान से इस समस्या का समाधान हो जाता है।

विटामिन बी 12 की कमी के उपचार के लिए मांसाहारियों में आहार में सुधार के साथ, आमतौर पर तीन से छह महीने तक कैप्सूल दिए जाते हैं। हालांकि शाकाहारियों का स्तर सामान्य होने तक कैप्सूल लेने कि सलाह दी जाती है और कुछ समय अगर लक्षण दोबारा दिखते हैं तो दवा लेने को कहा जाता है।

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