अरोमा थेरेपी से डालें अपने बालों में जान

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बालों को खूबसूरत बनाये रखने के लिए भारतीय प्राकृतिक पद्घतियों का आज भी सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी ही एक विधि है अरोमा थेरेपी, जिसके बारे में बता रहा हूँ.

बालों की उत्पत्ति त्वचा के नीचे स्थित रोम कूप से होती है। प्रत्येक रोम कूप के नीचे रोम कोशिका या पैपिला होती है। यही रक्त धमनियों से पोषक तत्व ग्रहण करती है और नए बालों को जन्म देती है। ऐसा माना जाता है कि इससे एक माह में आधा इंच और एक वर्ष में पांच से छह इंच तक बाल बढ़ जाते हैं.

आवश्यक तेल
अरोमा थेरेपी में तेलों का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। आवश्यक तेलों के बिना ये थेरेपी अधूरी है। फल, फूल, पत्ते, छाल और विभिन्न पौधों की जड़ों से निकले अर्क से खास तरह के सुगंधित तेलों का निर्माण किया जाता है। इन पौधों के अर्क में जीवन के समान गुण होते हैं और इन्हें पौधों का रक्त कहा जाता है। हर तेल की अपनी अलग चिकित्सीय खासियत होती है। अरोमा थेरेपी में इस्तेमाल होने वाले आवश्यक तेलों को आमतौर पर तेल ही कहा जाता है, लेकिन ये सिर्फ तेल ही नहीं होते। इनके अलावा और भी कई चीजें होती हैं। बालों के लिए खासतौर पर उपयोगी तत्त्व ईथर का तेल, जैतून का तेल, खाड़ी तेल, केडरवुड, चकोतरा, जोजोबा तेल, लैवेंडर, नीबू, मेहंदी, रोमन कैमोमाइल होते हैं। ये थेरेपी न सिर्फ बालों को झड़ने से रोकने में मदद करती है, बल्कि बालों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ उनमें नई जान भी डालती है। ये थेरेपी न सिर्फ बालों की बल्कि मस्तिष्क के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। इन आवश्यक तेलों में एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल, अवसाद विरोधी बहुत से गुण होते हैं, जो हमारे शरीर और आत्मा को रिलेक्स करते हैं।

कैसे काम करती है अरोमा थेरेपी
आवश्यक तेलों को शरीर में नाक (सुगंध से) या त्वचा के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इन तेलों का हर सुगंधित अणु तंत्रिका तंत्र के भीतर तक रिसेप्टर कोशिकाओं से जुड़ जाता है। ये अणु मस्तिष्क के लिंबिक प्रणाली में जाते हैं और लिंबिक प्रणाली सीधे मस्तिष्क के उन भागों से जुड़ी होती है, जो दिल की धड़कन, श्वास, रक्तचाप, याददाश्त, तनाव का स्तर, हारमोन संतुलन आदि को नियंत्रित करती है.

बालों की देखभाल
स्वस्थ बालों को रोजाना जरूरी न्यूट्रिशंस की आवश्यकता होती है। अस्वस्थ बालों के लिए कई बातें जिम्मेदार होती हैं, जैसे ऊष्मा (आयरन, ब्लो ड्रायर, कर्लर आदि), यू वी रे (सूर्य, धूल, मिट्टी), मेकेनिकल डिवाइस (कंघी, ब्रश आदि), कैमिकल्स (हेयर कलर, पर्म, पूल कैमिकल आदि) और अपौष्टिक भोजन।

हमेशा सल्फेट मुक्त प्राकृतिक हेयर केयर प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें। किसी भी हेयर प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री को जरूर पढ़ें। बालों में रंग का इस्तेमाल करते वक्त ध्यान दें कि रंग अमोनिया मुक्त हो या फिर प्राकृतिक डाई जैसे मेहंदी आदि का इस्तेमाल करें। अरोमा थेरेपिस्ट का मानना है कि आवश्यक तेलों में बालों को झड़ने से रोकने के साथ-साथ उन्हें बढ़ने में मदद करने की भी खासियत होती है। किसी भी कारण से बाल झड़ने या बालों की अन्य समस्याओं को अरोमा थेरेपी के जरिए ठीक किया जा सकता है

बालों की सुरक्षा
तौलिये से सुखाने के दौरान बालों को तेजी से रगडें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से धीरे-धीरे पोंछें। ये इसलिए जरूरी है, क्योंकि गीले बाल कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। गीले बालों में कभी भी ब्रश या कंघी का इस्तेमाल न करें। बालों को सुलझाने के लिए मोटे और खुले दांतों वाले कंघे का इस्तेमाल ही करें। हेयर ड्रायर का इस्तेमाल थर्मल प्रोटेक्टर के साथ ही करें, ताकि आपके बालों का ऊष्मा से बचाव हो सके। यू वी प्रोटेक्टर कंडीशनर का इस्तेमाल बालों को यू वी किरणों से बचाने के लिए करें.

खान-पान का भी रखें खास ख्याल
रूखे-सूखे और कटे-फटे बालों के लिए जरूरी तैलीय अम्लों की आवश्यकता होती है, जो पौष्टिक भोजन से ही पूरी होती है। विटामिन बी युक्त भोजन बालों को बढ़ने में मदद करता है.

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