भारत के 10 भारतीय स्वतंत्रता सैनानी जिन्होंने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया

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भारत को आज़ादी बहुत सारे महान स्वतंत्रता सैनानियों की वजह से मिली है। भारत ने इन सैनानिओं की वजह से अंग्रेज़ो, फ्रेंच और पोर्तुगी से राजनैतिक स्वतंत्रता हासिल की है। भारत को आज़ाद करने की लड़ाई कई सालों तक चली और कई लोगों के संघर्ष के बाद इसे अंग्रेज़ो से मुक्त करवाया गया। हम आपको भारत को आज़ादी दिलवाने वाले टॉप मशहूर स्वतंत्रता सैनानियों के बारे में बताते है।

10. लाल बहादुर शास्त्री

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Photo : Indiatimes

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में हुआ था और वह भारत के दूसरे प्रधानमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता थे।वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के साथ 1920 में जुड़े और वह महात्मा गाँधी से बहुत प्रेरित थे। वह जवाहरलाल नेहरू को मानते थे आज़ादी के बाद वह रेलवे मंत्री बने और कुछ सालों बाद वह ग्रह मंत्री बने। उन्होंने वाराणसी के ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंटर कॉलेज से पढ़ाई की थी और 1928 में उन्होंने मिर्ज़ापुर की ललिता देवी से शादी की और इनके छह बच्चे हुए । यह खुद सर्वेंट पीपल सोसाइटी के सदस्य बने और हरिजनों के लिए इन्होंने लड़ाई की। इसके बाद यह इसी सोसाइटी के राष्ट्रपति बन गए और 1966 में हार्ट अटैक से इनकी मृत्यु हो गयी।

9. सरदार वल्लबभाई पटेल

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Photo : NTD India

सरदार वल्लबभाई पटेल भारत के टॉप नेताओं में से एक है और इनका जन्म ३१ अक्टूबर 1875 में हुआ था। वह भारतीय वकील और राजनीतिज्ञ थे और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता थे। इन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए बहुत संघर्ष किया और इन्हे सरदार यानि मुखिया कहा जाता था। यह गुजरात में पले बड़े और खेड़ा, बोरसद और बारडोली से किसानो की देखरेख करने वाले वकील बने। वह भारत के पहले ग्रह मंत्री और डिप्टी मिनिस्टर थे जिन्होंने पंजाब और दिल्ली में धार्मिक विचारों को मानने से मना कर दिया था। उन्होंने देश में शांति बनाये रखने के लिए बहुत म्हणत की और उनकी मृत्यु 1950 में हुई।

8. सरोजिनी नायडू

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Photo : Patrika

भारत की बुलबुल कहे जाने वाली सरोजिनी चट्टोपाध्याय मशहूर भारतीय स्वतंत्र सैनानी और कवियित्री थी और इनका जन्म 1879  में हुआ था। वह पहली महिला गवर्नर थी और दूसरी महिला जो 1925 में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्रेजिडेंट बानी थी। इनका जन्म हैदराबाद में हुआ था और इनके पिता डॉक्टर और माँ कवियित्री थी, जो बंगाली में कवितायेँ लिखती थी। यह अपने नौ भाई बेहेन में सबसे बड़ी थी। 19 साल में इनकी शादी गोविंदराजुलू नायडू से हुई थी और इनके 5 बच्चे हुए। 13 साल की उम्र में इन्होंने कवितायेँ लिखनी शुरू की और साल 1905 में उनकी पहली किताब ‘द गोल्डन थ्रेसहोल्ड” प्रकाशित हुई। 70 साल की उम्र में उनका निधन सन 1949 में हुआ।

7. लाला लाजपत राय

Photo : biographyhindi

लाला लाजपत राय का जन्म 1865 में हुआ और वह एक मशहूर भारतीय लेखक थे और उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ भारत को आज़ादी दिलवाने के लिए लड़ाई लड़ी। उन्हें पंजाब केसरी कहा जाता है जिसका मतलब पंजाब के शेर होता है और वह शुरू शुरू में पंजाब नेशनल बैंक के काम के साथ जुड़े थे। उनके पिता उर्दू के अध्यापक थे। राय हिन्दू गतिविधियों से बहुत प्रभावित थे और उन्होंने भारतीय राजनीती में अपने लिखने से करियर बनाया। यह लाल बाल पाल में से एक थे और अहिंसा आंदोलन करते हुए यह पुलिस द्वारा मारे जाने पर बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए थे और तीन हफ़्तों तक जूझने के बाद 1928 में इनकी मृत्यु हो गयी।

6. सुभाष चंद्र बोस

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Photo : NDTV Khabar

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में हुआ था और उन्हें भारत का हीरो कहा जाता था। वह इंडियन नेशनल आर्मी के प्रवर्तक थे यह भारत के भविष्य के बारे में बात करने के लिए आज़ादी से पहले लंदन भी गए थे। बोस काफी होशियार थे और अच्छे छात्र थे, जिन्हे खेलकूद में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से फिलोसोफी में पढ़ाई की थी। बोस स्वामी विवेकानंद की बातों से बहुत प्रभावित थे और वह उन्हें आध्यात्मिक गुरु मानते थे। उन्होंने भारत को बर्बाद करने वाले अंग्रेज़ों से बदला लेने का फैसला किया और अपने एक अंग्रेज़ शिक्षक को 1916 में मारा। उन्हें गाँधी और उनके नेताओं ने नकारा और इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी बनायीं। 1945 में अंग्रेजी सेना ने उन्हें मारा और उनकी मृत्यु इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा लगते हुए हुई थी।

5. राजेंद्र प्रसाद

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Photo : सत्याग्रह

राजेंद्र प्रसाद का जन्म 1884 में हुआ था और वह गणतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति थे। इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्वतंत्रता आंदोलन के समय साथ दिया। वह बिहार के नेता थे और महात्मा गाँधी का समर्थन करते थे। इन्हे 1931 में नमक सत्याग्रह और 1942 में क्विट इंडिया मूवमेंट के लिए अंग्रेज़ो ने जेल भेज दिया था । वह 1934-35 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रेजिडेंट रहे। इन्होंने भारत में शिक्षा पर ज़ोर दिया। इन्हे दुबारा प्रेसीडेंसी के लिए चुना गया और यह पहले ऐसे आदमी हैं, जिन्हे दो बार नियुक्त किया गया। इनका निधन 1963 में हुआ।

4. दादाभाई नौरोजी

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Photo : biographyhindi

दादाभाई नौरोजी को ग्रैंड ओल्ड मैन कहा जाता था। यह पारसी थे और इनका जन्म 1825 में हुआ था। यह ज्ञानी, शिक्षित और कॉटन के व्यापारी थे।1862 और1895 में वह यूनाइटेड किंगडम के पार्लियामेंट के सदस्य थे। ऐ ओ हुमे और दिनशॉ एडुल्जी वाचा के साथ वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवर्तक थे। 1867 में उन्होंने एक प्रकाशन शुरू किया और खुद की कॉटन व्यापर करने वाली कंपनी बनायीं। इन्हे स्वंत्रता आंदोलन में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

3. भगत सिंह

Photo : Hari Bhoomi

भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को हुआ था। वह भारतीय समाजकर्ता और भारत के सबसे प्रभावित क्रांतिकारी थे। उनका जन्म सिख परिवार में हुआ था और उन्हें शहीद भगत सिंह कहकर बुलाया जाता है। ब्रिटिश राज में उनके परिवार के सभी सदस्य आंदोलन गतिविधियों में शामिल थे। भगत सिंह ने लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लिया था और कई आंदोलन गतिविधियों में वह शामिल थे। उन्हें देश का समर्थन मिला और उनकी गतिविधियों से कई लोग प्रभावित हुए और आखिरकार 1931 में फांसी की सजा से उनकी मृत्यु हुई।

2. बाल गंगाधर तिलक

Photo : 4to40

बाल गंगाधर तिलका का जन्म 1920 में हुआ था। वह भारतीय पत्रकार और सामाजिक गुप्तचर थे।वह वकील, स्वतंत्रता सैनानी थे और अंग्रेज़ उन्हें “बेचैन भारत का पिता” कहते थे। वह सबसे मजबूत और स्वराज के पहले वकील थे। वह कहते थे, “स्वराज मेरा अधिकार है और यह मुझे मिलना चाहिए।” 1871 में उनकी शादी तापीबाई से हुई थी और शादी के बाद उनकी पत्नी का नाम बदलकर सत्यभामाबाई रखा गया। वह मानते थे की खुद को खुश रखने से अच्छा अपने देश और परिवार को खुश रखना चाहिए।

1. गाँधी जी

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Photo : सत्याग्रह

देश के पिता कहे जाने वाले मोहनदास करमचंद गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था। वह अंग्रेजी शासक के बहुत महत्व्पूर्ण नेता थे। उन्होंने अहिंसा आंदोलन की शुरुवात की। उन्हें बापू भी कहा जाता था और उनका जन्म गुजरात के हिन्दू परिवार में हुआ था। वह पारम्परिक धोती और शाल में रहते थे। वह शाकाहारी थे और सामाजिक विरोध के लिए लम्बे उपवास भी रखते थे। उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण नेताओं को प्रभावित किया और आखिरकार 1947 में स्वतंत्रता को हासिल किया।

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