जनवरी 2013 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 2.01 प्रतिशत हुई: सात महीने में सबसे ज्यादा

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खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण जनवरी 2013 में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.01 प्रतिशत हो गई। जो सात महीने का उच्चतम स्तर है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2012 में 7.8 प्रतिशत और जनवरी 2012 में 3.04 प्रतिशत थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2013 में खाद्य मुद्रास्फीति 7.5 प्रतिशत थी। पिछले महीने की महंगाई दर 4.05 फीसदी थी।

इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि मुद्रास्फीति अब नीचे की ओर है। उन्होंने कहा कि आरबीआई मूल्य वृद्धि और आर्थिक विकास के बीच उचित संतुलन बनाना जारी रखेगा।

वहीं, थोक महंगाई के आंकड़े भी आज जारी किए गए। थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने गिरावट आई। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति जनवरी, 2008 में 12.5 प्रतिशत पर आ गई है। खाद्य कीमतों में वृद्धि के बावजूद, थोक खाद्य मुद्रास्फीति जनवरी 2013 में कम हुई।

हालांकि, अप्रैल 2021 से लगातार दसवें महीने थोक महंगाई दहाई अंक में रही है। थोक मूल्य मुद्रास्फीति दिसंबर 2012 में 12.5 प्रतिशत थी। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) द्वारा मापी गई मुद्रास्फीति जनवरी 2011 में 4.81 प्रतिशत थी।

जनवरी,। 203 में खाद्य मुद्रास्फीति 10.6 प्रतिशत थी। दिसंबर, 2011 में यह 4.5 फीसदी थी। जनवरी में सब्जियों के दाम 4.5 फीसदी बढ़े थे। जो दिसंबर, 2021 में 31.8 फीसदी थी।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (MoCI) ने एक बयान में कहा कि खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, मूल धातुओं, रसायनों, रासायनिक उत्पादों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण जनवरी, 2009 में थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई।

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