मिरगी के जटिल स्वरूप के कारणों की पहचान और उपाय

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जापान के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने टेम्पोरल लोब इपिलेप्सी (मिरगी) के कारणों का पता लगा लिया है। यह एक तंत्रिका संबंधी भीषण स्थिति होती है और इससे दुनिया के एक प्रतिशत वयस्क प्रभावित होते हैं। संवाद समिति क्योदो की खबर के अनुसार टोक्यो विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं के एक दल ने कहा कि उनके अध्ययन में पाया गया कि जब कोई बच्चा जाड़े के कारण बुखार से ग्रसित होता है तो उसके मस्तिष्क में उत्तेजित करने वाला एक तंत्रीय संकेत पैदा होता है। इसी के चलते टेम्पोरल लोब इपिलेप्सी की स्थिति भी पैदा होती है।

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अध्ययन दल में शामिल टोक्यो विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर ने कहा कि इसके निष्कर्षों से मिरगी के रोकथाम वाले उपचार का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। मिरगी के कारण दुनिया भर के करीब एक प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं। जापान में माना जाता है कि करीब दस लाख लोग इससे पीडि़त हैं।

मिर्गी का रोग (Epilepsy Disease)

मिर्गी का रोग एक ऐसा रोग हैं. जिससे पीड़ित होने पर व्यक्ति को दौरे पड़ते रहते हैं. जिसके कारण कई बार व्यक्ति बेहोश भी हो जाता हैं. मिर्गी एक मस्तिष्क से जुडी हुई बिमारी हैं. जैसे यदि किसी व्यक्ति का मस्तिष्क ठीक ढंग से कार्य न कर पा रहा हो तो व्यक्ति को मिर्गी का रोग हो सकता हैं. मिर्गी का रोग व्यक्ति के द्वारा अत्यधिक नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने के कारण यामानसिक सदमा लगने के कारण भी हो सकता हैं.

लक्षण (Symptoms)

  1. मिर्गी के रोग से ग्रस्त होने पर व्यक्ति के शरीर में झटके आना तथा शरीर का अकड़ जाता हैं.
  1. उसकी आँखे ऊपर की ओर उलट जाती हैं.
  1. व्यक्ति का अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता. इसलिए वह अनियंत्रित शारीरिक गतिविधियाँ करता हैं.
  1. मिर्गी के दौरे आने पर व्यक्ति अपने होंठों को तथा जीभ को काटने लगता हैं.
  1. कई बार व्यक्ति मिर्गी के दौरे आने पर एक जगह अपनी निगाहों को केन्द्रित कर लगातार देखता रहता हैं.

बिजौरा निम्बू का रस तथा निर्गुण्डी का रस

  1. मिर्गी की बिमारी को ठीक करने के लिए एक बिजौरा निम्बू लें और निर्गुण्डी के पौधे की पत्तियां लें.
  1. अब बिजौरा नीबू को काट लें और उसका रस एक कटोरी में निकाल लें.
  1. अब निर्गुण्डी के पौधे की पत्तियां लें और उन्हें धोने के बाद पीसकर इसका रस निकाल लें.
  1. अब बिजौरे निम्बू के रस में निर्गुण्डी के पत्तियों का रस डालकर अच्छी तरह से मिला लें.
  1. अब बिजौरे निम्बू और निर्गुण्डी के रस की बूंदों को अपनी नाक में डाल लें.

लगातार 4 दिनों तक बिजौरे निम्बू और निर्गुण्डी के रस को नाक में डालने से आपको मिर्गी के रोग में काफी राहत मिलेगी.

निम्बू और हिंग

  1. मिर्गी की बिमारी से राहत पाने के लिए एक निम्बू लें और थोडा सा हिंग का पाउडर लें.
  1. अब निम्बू को दो भागों में काट लें और उसपर थोडा – सा हिंग पाउडर छिड़क दें.
  1. अब इस निम्बू के रस को आराम – आराम से चूसें.
  1. इसके अलावा निम्बू के साथ गोरखमुंडी का भी प्रयोग कर सकते हैं.
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निम्बू में हिंग पाउडर या गोरखमुंडी मिलाकर रोजाना चूसने से कुछ ही दिनों में मिर्गी के दौरे आने बंद हो जायेंगे.

प्याज का रस

  1. मिर्गी के दौरों से हमेशा – हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए प्याज लें और उन्हें पिसकर लगभग 75 मिली. रस निकाल लें.
  1. अब एक गिलास में थोडा पानी लें और इसमें प्याज के रस को मिला लें.
  2. इसके बाद सुबह उठकर इस पानी का सेवन करें.

रोजाना सुबह उठने के बाद प्याज के रस में पानी मिलकर सेवन करने से आपको मिर्गी के दौरे पड़ने बंद हो जायेगें. इसके अलावा यदि मिर्गी के रोग से ग्रस्त व्यक्ति मिर्गी के दौरे पड़ने के बाद बेहोश हो जाता हैं तो भी आप प्याज के रस का प्रयोग कर सकते हैं. मिर्गी के रोग से पीड़ित व्यक्ति की बेहोशी दूर करने के लिए थोडा सा प्याज का रस लें और उसे रोगी व्यक्ति को सुंघा दें. प्याज के रस को थोड़ी देर सूंघाने के बाद व्यक्ति की बेहोशी बिल्कुल ख़त्म हो जायेगी.
मिर्गी की बिमारी से प्रभावित व्यक्ति को यदि दौरे पड़ने के बाद बेहोशी आ गई है तो आप लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं.

लहसुन

  1. लहसुन का प्रयोग करने के लिए कुछ लहसुन की कलियाँ लें और उनके ऊपर के छिलके हटा दें.
  1. लहसुन की कलियों को छिलने के पश्चात् इन्हें अच्छी तरह से कूट लें.
  1. अब कूटे हुए लहसुन को बेहोश हुए व्यक्ति को सुंघाए. लहसुन की कलियों को कूटकर सुंघाने के कुछ ही मिनट बाद व्यक्ति की बेहोशी दूर हो जायेगी.

दूध और लहसुन

  1. मिर्गी के रोग से मुक्ति पाने के लिए लहसुन की 10 कली लें और एक गिलास दूध लें.
  1. अब एक बर्तन में दूध डालें और उसे उबालने के लिए रख दें.
  1. जब दूध अच्छी तरह से उबल जाएँ तो इसमें लहसुन की कलियाँ डाल दें.
  1. लहसुन की कलियों को दूध में कुछ देर उबालने के बाद उसे उतार कर पीने लायक ठंडा कर लें.
  1. अब इस दूध में से लहसुन की कलियों को निकालकर इन्हें खा लें.
  1. लहसुन का सेवन करने के बाद जिस दूध में लहसुन को उबाला था. उसे पी लें.
  1. इसके अलावा आप मिर्गी के रोग से मुक्त होने के लिए लहसुन की कलियों को सरसों के तेल में भी सेंक कर खा सकते हैं. लहसुन की कलियों को दूध में मिलाकर खाने से या सरसों के तेल में भूनकर कर खाने से आपको जल्द ही मिर्गी के रोग से हमेशा – हमेशा के लिए मुक्ति मिल जायेगी.

घी

मिर्गी के रोग के लिए लहसुन बहुत ही फायदेमंद होता हैं. मिर्गी के रोग को ठीक करने के लिए आप इसका प्रयोग अनेक प्रकार से कर सकते हैं. जैसे यदि आप लहसुन की कलियों को घी में भूनकर प्रतिदिन खाएं तो आपको मिर्गी के रोग और रोग के कारण होने वाले दौरों से छुटकारा मिल जाएगा.
मिर्गी की बिमारी के निदान हेतु 10 ग्राम लहसुन लें और 30 ग्राम काला तिल लें.लहसुन और काला तिल

  1. अब काले तिल को तथा लहसुन को एक साथ कूट लें.
  1. लहसुन और तिल को कूटने के बाद इस मिश्रण का सेवन करें.

रोजाना दिन में एक बार 25 दिनों तक इस मिश्रण का सेवन करने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाएगा.

तिल

यदि किसी व्यक्ति को वायु के कारण मिर्गी के दौरे आते हैं तो भी आप लहसुन का प्रयोग कर सकते हैं.

  1. वायु के द्वारा पैदा होने वाले मिर्गी के रोग को दूर करने के लिएएक ग्राम लहसुन लें और तिन ग्राम तिल लें.
  1. अब इन दोनों को एक साथ मिलाकर खूब महीन पीस लें.
  1. पिसने के बाद तिल तथा लहसुन के इस मिश्रण का सेवन करें.

लगातार 15 से 20 दिनों तक इस मिश्रण का सेवन करने से आपको इस रोग में आराम मिल जाएगा.

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