गीता ज्ञान- अध्याय 7 शलोक 4-7

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हरे कृष्ण। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है वह पंच महाभूत जल, आकाश, अग्नि , वायु और पृथ्वी यानी अपरा(जगत )
मन, बुद्धि और अहंकार यानी परा ( जीव) के कारण ही है। । इन आठों के संयोग से ही सब कुछ मौजूद है। सभी पदार्थों की उत्पत्ति का कारण भी यही आठ तत्व हैं।
जैसे स्वामि तुलसी दास कहते हैं

“सीयाराम मय सब जग जानि,
करहुं प्रणाम ज़ोर जुग पानी ”

वैसे ही यह पूरी ब्रह्मांड भगवान का ही अंश है। इसका भूत, वर्तमान, भविष्य , आदि , अंत सब परमपिता परमात्मा ही है ऐसा जानना ही ज्ञान है। सब कुछ भगवत स्वरूप है भगवान के सिवाय दूसरा कुछ है ही नहीं ऐसा अनुभव होने पर ही मनुष्य मोक्ष यानी परमानन्द की प्राप्ति की और अग्रसर हो सकता है। सुख शान्ति का मूल मन्तर है “वासुदेव: सर्वम्”

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