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राजस्थानी भोजन की व्याख्या राजस्थान का प्रसिद्ध खाना

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मनुष्य को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है भोजन के बिना जीवन नहीं है चाहे कोई भी मनुष्य हो भुख लगने पर वो भोजन को नजरंदाज नहीं कर सकता है

ऐसे ही आज हम राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में विषेश तोर से ज्यादा पसंद कीये जाने वाले भोजन के कुछ ऐसे पहलुओं पर बात कर रहे हैं जिन्हें कृषक लोग बहुत ही पसंद करतें हैं

राजस्थानी भोजन सम्बन्धी निम्न महत्वपूर्ण तथ्य :

1 क्लेवा अथवा रोट : ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह का नाश्ता जो प्राय: पिछले शाम का बचा हुआ भोजन होता है

2 भात अथवा रोट : ग्रामीण क्षेत्रों में मध्यान्ह का भोजन जिसके अंतर्गत प्राय: जौ अथवा मक्के की रोटी और हरि सब्जी होती है

3 सीरा : गेहूं के आटे में घी भूनकर व गुड़ या चीनी मिलाकर बनाया जाता है जिसे कृषक बहुत पसंद करते हैं

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4 राब : ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह के भोजन में मक्के के दलिये को छांछ मिलाकर बनाया जानें वाला भोजन

5 सांगरी : खेजड़ी की फलि की बनाई जाती है

6 सोगरा : बाजरे के आटे की मोटी रोटी जो आकरी सेकी जाती है

7 खींच : यह कुटे हुए बाजरे को सही अनुपात में मोठमं मिलाकर पानी में गाढ़ा गाढ़ा पकाया जाता है और कभी कभी स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें जरा सा घी अथवा छांछ भी डाली जाती है

8 घाट : मक्के अथवा बाजरे का मोटा आटा जिसमें पानी अथवा छांछ में पकाया जाता है

9 निरामिष : इस भोजन में मक्का गेहूं ज्वार की रोटी दालजे हरि सब्जीया जेसे ककड़ी, लोकी, घीघा, तुरोई, पालक, गाजर, गोभी, बेगन, भिण्डी, टमाटर, अरवी, पत्तागोभी, मुली, मटर, आलू, गाठगोभी, व मिर्च, तेल, दुध, दही, मक्खन,

पापड, चटनी और मसाले आदि होते हैं

10 आमिष : मांस के व्यंजन जिसमें सामान्यतः कोरमा, कोपता, कबाब, शामी, मुर्ग, मुसल्लम आदि व्यंजन होते हैं

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