पवित्र होने के बाद भी ‘पूजा-पाठ’ के इस काम में हाथ भी नहीं लगा सकती महिलायें

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हिंदू धर्म में रीति-रिवाजों को कितनी मान्यता दी जाती है ये तो आप सभी जानते हैं। इसके अलावा हमेशा से ही हिंदू धर्म में लोगों की आस्था और विश्वास रहा है। यही वजह है कि आज हमारे भारत देश में यह सबसे बड़ा धर्म है और इस पर आस्था रखने वाले लोग भी करोड़ो में है। हालांकि जिस तरह से यह धर्म सीधा लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है एक यही वजह है कि इसे लेकर लोग बहुत से नियमों का पालन करते हैं। अपने घर परिवार की सुख शांति के लिए भी कई तरह के पूजा पाठ करते हैं।

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Even after becoming holy, women cannot even participate in this work of 'worship'

बात जब पूजा पाठ की आती है तो हम जानते हैं कि ये हमारे धर्म में एक पवित्र चीज होती है। इस दौरान सामग्री से लेकर नियमों के पालन तक हर चीज पर गौर किया जाता है। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जिसके बारे में न आपने पहले कभी सुना होगा और न ही पढ़ा होगा।

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Even after becoming holy, women cannot even participate in this work of 'worship'

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हमारे यहां हर पूजा पाठ में कलश, हवन सामग्री आदि जरुरी चीजों के साथ साथ नारियल को भी शुभ माना जाता है और उसकी पूजा की जाती है। साथ ही किसी भी खास मौके पर नारियल को फोड़ा भी जाता है। लेकिन शायद आपको इस बारे में जानकारी नहीं होगी कि ऐसा भी एक समय होता है जब शुभ होते हुए भी नारियल को दरकिनार किया जाता है।

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हिन्दू धर्म में कलश स्थापना से लेकर किसी का सम्मान करना हो या फिर भगवान को भोग लगाना हो नारियल के बिना यह सब विधियां पूरी नहीं होती। मगर क्या आप जानते हैं नारियल को स्त्रियों द्वारा नहीं फोड़ा जा सकता। आखिर ऐसा क्यों है कि नारियल को स्त्रियों द्वारा नहीं फोड़ा जा सकता। दरअसल स्त्रियां बीज रूप में शिशुओं को जन्म देती हैं और नारियल भी बीज रूप माना जाता है।

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ऐसे में मान्यता है कि ईश्वर को अर्पित करने के बाद पुरूष ही इसे फोड़ते हैं। दूसरी ओर यह कठोर भी होता है। फिर कहा जाता है कि इसकी उत्पत्ती के समय भगवान विष्णु नारियल के साथ अन्य दो चीजें लेकर प्रकट हुए लक्ष्मी और कामधेनु इस कारण इसे और पवित्र माना जाता है। यह प्रजनन का कारक है। यही नहीं इसमें तीन आंखों रूपी आकृति बनी होती है इसे त्रिनेत्र के तौर पर देखा जाता।

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Pic Credit : Metro

यह इतना पवित्र होता है कि इसमें आदि देव महादेव और ब्रह्माजी के साथ विष्णु जी का निवास माना जाता है। यदि नारियल के जल से शिवलिंग पर रूद्राभिषेक किया जाए तो यह शनि शांति में अच्छा उपाय होता है। यही नहीं यह शारीरीक दुर्बलता को दूर करता है।

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