चाणक्य नीति: ऐसे व्यक्ति किसी के हितकर नही हो सकते, एक बार जरूर पढ़ें

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हर कोई यही चाहता है कि उसका साथी या उसके अपने हमेशा उसके लिए हितकर साबित हों लेकिन सभी के साथ ऐसा बिल्कुल भी नही होता। यह दुनिया एक मायाजाल है और सभी यहां ऐसे फंसे हुए हैं जैसे मछली जाल में फंस जाती है। सभी को सिर्फ अपने फायदे की ही पड़ी रहती है कोई किसी अन्य के बारे में कभी नही सोचता।

बहुत से ऐसे भोले लोग भी हैं जो अन्य लोगों के बहकावे में आकर अपनी लाइफ को बर्बाद कर लेते हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं ऐसे व्यक्ति किसी के हितकर नही हो सकते। आइये जानते हैं वे कौन से व्यक्ति हैं जो किसी के कभी भी हितकर नही हो सकते।

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आपने ये जरूर सुना होगा कि वन की अग्नि चंदन के लकड़ी को भी जला देती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति कभी किसी का भला नही कर सकते चाहें वो उसका अपना ही क्यों न हो।

इसलिए दुष्टों से हमेशा दूर रहना चाहिए। इसी में आपकी भलाई है। दुष्टों का कभी भी साथ नही करना चाहिए और ना ही इन पर कभी भरोशा करना चाहिए। ये वे लोग होते हैं जो अपने फायदे के लिए किसी को भी नही छोड़ते और ना ही कभी किसी की मदद करते हैं।

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