आखिर क्यों चाणक्य ने हमे बुरा इंसान बनने के लिए कहा है?

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आचार्य चाणक्य को आज कोन नहीं जानता? वे इस दुनिया के एक महान नितितज्ञ रहे है। उनकी कहीं बाते आज भी हमारा सटीकता से मार्गदर्शन करती है। चाणक्य नीति (Chanakya Neeti) में उन्होंने एक बात यह कही है कि इंसान को ज्यादा सीधा भी नहीं रहना चाहिए, कभी कभी उसे बुरा भी बनाना चाहिए।

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बचपन से हमे सिखाया गया है कि सदाचार सबसे महान गुण है। यह बात कुछ हद तक तो ठीक है लेकिन आचार्य चाणक्य की माने तो हद से ज्यादा सरल एवं सदाचारी होना महान दुःख का कारण है। आचार्य चाणक्य ने सदाचारी मनुष्यो की संदर्भ में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है जिसे हर मनुष्य को जरूर याद रखनी चाहिए।

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आचार्य चाणक्य कहते है जंगल में जो पेड़ सीधे होते है वो जल्दी काटे जाते है, और जो तेडे मेढे होते है वो बच जाते है। ठीक उसी प्रकार जो लोग सीधे होते है, उन्हें जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सीधा समझकर लोग उसे दबाने की कोशिश करते है। अगर जिंदगी में सुखी रहना है, तो मनुष्य को हद से ज्यादा सीधा भी नहीं होना चाहिए।

इस संदर्भ मै आचार्य चाणक्य एक और बात कहते है कि हमे गुड की तरह मीठा भी नहीं होना चाहिए जिसे की लोग हमे कच्चा ही खा जाए। और हमे इतना कड़वा भी नहीं होना चाहिए कि लोग हम पर थूकने लगे। वास्तव में आचार्य चाणक्य ने जैसे के साथ वैसा व्यवहार करने के लिए कहा है।

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