गीता ज्ञान- अध्याय 4 श्लोक 3-7

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आज का संदर्भ

हरे कृष्ण। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि मैंने यह ज्ञान सबसे पहले महाराजा सूर्य को दिया तो आम आदमी की तरह ही अर्जुन के मन में सवाल आया और उसने भगवान श्री कृष्ण से पूछा कि आपका जन्म तो इसी समय का है फिर आपने दुनियाँ की शुरूआत में ही यह ज्ञान सूर्य को कैसे दिया। यह अर्जुन का स्वभाविक सवाल है जो किसी के भी मन में आएगा। गीता ख़ुद ही सारी शंकाओं का निवारण करती है।

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भगवान श्री कृष्ण कहते हैं अर्जुन जैसे ये दुनिया अनादि है वैसे ही तू और मैं भी अनादि हैं तेरे मेरे अनेकों जन्म हो चुके हैं। लेकिन तुझे उसका ज्ञान नहीं है और मैं सब जानता हूँ।

जब जब भी दुनियाँ में धर्म का नाश हो जाता है अधर्म का बोल बाला हो जाता है। यानि अत्याचार बढ जाते है। दुष्टों का राज हो जाता है। तब तब मैं उस अत्याचार को समाप्त करने के लिये जन्म लेता हूँ। तर्क बुद्धि लोग जो पुनर्जन्म में विस्वास नहीं करते, अवतार की धारणा में जिनका विस्वास नहीं है वो यह समझ सकते हैं कि भगवान का इशारा उन सभी महान पुरुषों की ओर है जिन्होंने समय समय पर जन्म ले कर मानव कल्याण के लिये कार्य किये हैं।

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