सावधान अगर आप भी डालते है आंखों में आई ड्रॉप तो यह सच जान आंखें खुल जाएंगी!

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ड्राई आई या नेत्र-संबंधी दूसरी समस्याओं से जूझ रहे लोग यह बात भलीभांति जानते हैं कि आंखों में आई ड्रॉप डालना आसान काम नहीं है बल्कि यह एक आर्ट है। अक्सर आई ड्रॉप डालते वक्त ज्यादा लिक्विड निकल जाता है जो आंखों में कम जाता है और चेहरे पर ज्यादा फैल जाता है। लेकिन ज्यादातर आई ड्रॉप इस्तेमाल करने वाल लोग इस बात को नहीं जानते कि आई ड्रॉप की बॉटल को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि ताकि उससे निकलने वाला लिक्विड बर्बाद हो।

बिना डॉक्टरी सलाह के आंखों में न डालें ड्रॉप

प्रोपब्लिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक आई ड्रॉप हमारी आंखों से ओवरफ्लो करने लगता है क्योंकि ड्रॉप का साइज बड़ा होने की वजह से इंसान की आंखें एक बार में जितनी दवा को संभाल सकती हैं उससे ज्यादा दवा आंखों में पहुंच जाती है। नतीजा दवा बर्बाद होती है और ओवरफ्लो होकर चेहरे पर फैल जाती है।

दरअसल, दवा कंपनियां जानबूझकर ड्रॉप को बड़ा बनाती हैं ताकि दवा बर्बाद हो और मरीज अपनी जरूरत के हिसाब से ज्यादा दवा खरीदे। अगर ड्रॉप की गोली से तुलना की जाए तो यही ठीक वैसा ही है जैसा हर बार आप एक गोली खाते वक्त एक एक्सट्रा गोली को फेंक दें।

बरकरार रखें आंखों का नूर

फाइजर मेमो 2011 के मुताबिक इंसान की आंखें 7ul दवा को सोख सकती हैं, 2006 की एक स्टडी में यह बात सामने आयी थी कि आंखों के लिए मेडिसिन ड्रॉप का सही साइज 15ul होना चाहिए, हकीकत में आईड्रॉप का साइज 25 ul से 56ul तक होता है। हकीकत में आईड्रॉप का साइज 25 ul से 56ul तक होता है। (ul यानी माइक्रोलीटर जो 1 लीटर का 10 लाख वां हिस्सा होता है) 2014 में एक मशहूर आई ड्रॉप उत्पादक कंपनी ने इस बात को स्वीकार किया था कि 5ul, 10ul, 15ul, 20ul और 30ul के आईड्रॉप्स ग्लोकउमा के इलाज में बराबर रूप से कारगर साबित होते हैं।

ऐसे रखें अपनी आंखों का ख्याल

बिना डॉक्टरी सलाह के आंखों में न डालें ड्रॉप
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