10वां फेल मनसुखभाई ने बिना बिजली के बनाया इलेक्ट्रिक फ्रिज, कर रहे 3 करोड़ का सालाना कारोबार

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गुजरात के रहने वाले मनसुखभाई प्रजापति ने ऐसा रेफ्रिजरेटर बनाया है जो बिना बिजली के चलता है। मनसुखभाई का फ्रिज पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है। यह पानी, दूध, सब्जियों, फलों को कई दिनों तक ताजा रखता है।

वहीं मनसुखभाई पारंपरिक परित्यक्त तकनीक से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम भी कर रहे हैं। मनसुखभाई मिटिकूल नाम से एक बिजनेस चला रहे हैं और उनका सालाना टर्नओवर 3 करोड़ से ज्यादा है। दिलचस्प बात यह है कि मनसुखभाई दसवीं के भी नहीं हैं। 10वीं में फेल होने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई नहीं की। दरअसल, मनसुखभाई कुम्हार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनका परिवार वर्षों से मिट्टी के बर्तन बना रहा है। मनसुखभाई का बचपन घोर गरीबी में बीता।

मनसुखभाई बताते हैं कि उनकी मां सुबह 4 बजे उठकर मिट्टी लेने जाती थीं। पिता और परिवार के सदस्यों ने मिट्टी के बर्तन बनाए, लेकिन मेहनत रंग नहीं लाई। मनसुखभाई के माता-पिता चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर कुछ अच्छा करे, लेकिन वह 10वीं कक्षा में फेल हो गया और उसके बाद उसने आगे की पढ़ाई न करने का फैसला किया।

फिर 15 साल की उम्र में मनसुखभाई के पिता ने उनके लिए एक चाय की दुकान खोली। मनसुखभाई ने चाय बेचना शुरू किया। उनका कहना है कि एक दिन मिट्टी के कबेलु या टाइल की फैक्ट्री के मालिक चाय के लिए उनकी दुकान पर आए। इस दौरान उन्होंने मनसुखभाई को एक फैक्ट्री में नौकरी की पेशकश की और इससे उन्हें जीवन में एक नई शुरुआत मिली।

मनसुखभाई को काबेलू के कारखाने में काम करने के लिए केवल 300 रुपये का भुगतान किया गया था। फिर उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। इसके लिए मनसुखभाई ने एक सेठ से 50 हजार रुपये का कर्ज मांगा लेकिन उसके परिवार वाले नहीं माने। परिवार के सदस्यों को डर था कि उनके लिए इतना भुगतान करना असंभव होगा। फिर मनसुखभाई ने 30,000 रुपये का कर्ज लेकर अपना कारोबार शुरू किया।

मनसुखभाई ने सबसे पहले मिट्टी की ग्रिल बनाने की मशीन का आविष्कार किया था, जिसे उन्होंने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए डिजाइन किया था। इसके साथ ही उन्होंने 2200 वर्ग फुट जमीन पर खुद का निर्माण कर अपना काम शुरू किया। 2 साल की मेहनत के बाद साल 1990 में मनसुखभाई को सफलता मिली। फिर उन्होंने एक मिट्टी का जल शोधक बनाया।

मनसुखभाई 2001 के गुजरात भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। तभी उनके मन में एक ऐसा फ्रिज बनाने का विचार आया जो बिना बिजली के चलता हो। उसने मिट्टी से एक उत्पाद बनाने की सोची जो माल को ठंडा और ताज़ा रखेगा। यह बिना रोशनी के चलता था और आम आदमी इसे आसानी से खरीद सकता था लेकिन इसे बनाने में उन्हें 2 साल का समय लगा। इस मिट्टी के फ्रिज में फल और सब्जियां 5 से 6 दिन तक ताजा रहती हैं। इसमें दवाएं और अन्य सामान भी रखा जा सकता है। यह फ्रिज पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है।

गैर-इलेक्ट्रिक रेफ्रिजरेटर की सफलता के बाद, मनसुखभाई ने 2002 में वांकानेर में मिटिकुल नाम से 7 लाख रुपये के ऋण के साथ अपनी कंपनी शुरू की। मनसुखभाई वर्तमान में 250 से अधिक उत्पादों का निर्माण और विपणन कर रहे हैं। वे किचन में इस्तेमाल होने वाली हर चीज मिट्टी से बना रहे हैं। इनमें 250 से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं।

मनसुखभाई को उनके अनूठे आविष्कारों के लिए कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्हें पेरिस सरकार द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। उन्हें भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी से कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

10वीं फेल के बाद मनसुखभाई ने बिना बिजली के बनाया फ्रिज, 3 करोड़ का सालाना कारोबार करते हुए डेली पोस्ट पंजाबी पर सबसे पहले छपा।

 

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