नवरात्र पर्व में मां ब्रह्मचारिणी को पूजा कर ऐसे प्रसन्न करें

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नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है।

माता ब्रह्मचारिणी का मंत्र पढ़ें…

” दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ “

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ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली।देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है।मां के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं।

ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप सादा और सौम्य है। इनके एक हाथ में कमंडल है और दूसरे हाथ में जप माला है। नवरात्र के दूसरे दिन सायंकाल में ब्रह्मचारिणी माता को पीले वस्त्र पहनाकर हाथ में कमंडल और चंदन माला देने के उपरांत फल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करके आरती करने का विधान है।

इस तरह पूजा करने से आपको मनवांछित फल मिलता है ।

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