गुणकारी भूख वर्धक एवं ज्योति वर्धक शलजम का सेवन जरूर करें

आयुर्वेदिक टिप्स। पौष्टिक गुणों से भरपूर शलजम एक स्वास्थ्यवर्धक सफेद कन्दीय अमूल सब्जी है। शलजम क्रुसीफेरी परिवार का पौधा है। शीतकाल में इसकी खेती उपयुक्त मानी जाती है। यह कई कलर में जैसे लाल गुलाबी नीला और सफेद रंग में दिखाई देती है। प्राकृतिक गुणों से भरपूर शलजम की हरी पत्तियों में कैल्शियम और विटामिन ए का भरपूर भंडार पाया जाता है। यह विटामिन सी और विटामिन के का भी अच्छा स्रोत है।

इसके सेवन से शरीर की सुस्ती और भारीपन दूर होता है। यह नेत्रों के लिए उपयोगी और पेट संबंधी बीमारियों को दूर करती है। यह शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके सेवन से चेहरे पर चमक आती है हाथ व पैरों के नाखून मजबूत होते हैं। बालों के लिए भी एक काफी फायदेमंद होता है। शलजम का सूप काफी जायकेदार बनता है।

इसमें टमाटर एवं अन्य सब्जियां मिलाकर शलजम का स्वादिष्ट सूप बना सकते हैं। इसका अचार बनाया जाता है। यह हाजमे को दुरुस्त रखती है शलगम शलगम पेशाब संबंधी रोगों के लिए भी लाभदायक है। सुजाक आतशक के पेशाब की रुकावट को दूर करती है। शलजम में शकरा कम मात्रा में पाई जाती है। इसलिए मधुमेह के रोगियों के लिए इस की सब्जी काफी लाभदायक होती है। गले में सूजन व आवाज भारी होने पर शलजम का जूस फायदेमंद होता है। औषधीय रूप में शलजम का उपयोग काफी लाभकारी है।

उपयोग कैसे करें

  • शलजम की सब्जी और शलजम का सलाद रूप में उपयोग शहद के लिए गुणकारी माना जाता है।
  • सिरके के साथ शलजम  के छोटे-छोटे टुकड़े भिगोकर लगभग 1 सप्ताह के बाद सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • कच्ची शलजम सुबह चबाना दांतो के लिए अत्यंत लाभकारी है। दांत सुंदर चमकीले और मजबूत बनते हैं।
  • कच्चा शलजम निरंतर खाने से कब्ज की बीमारी दूर होती है। सर्दी अथवा किसी दूसरे कारणों से हाथ पैरों में खुरदरा हो जाने पर शलजम के टुकड़ों को थोड़े से पानी में उबालकर, उबले हुए टुकड़ों को हाथों और पैरों में मिलने से खुरदुरापन दूर हो जाता है।
  • शलजम का रस थोड़ा तीखा होता है अतः इसे गाजर टमाटर और अन्य सब्जियों के रस के साथ लेना ही सही रहता है।

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