बच्चों के लिए कहानी : बुद्धि का दान

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नट्टू बड़ा आलसी लड़का था। वह सुबह देर से उठा करता था। पढ़ाई में उसका मन बिल्कुल नहीं लगता था। कहने को तो वह रात के ग्यारह बजे तक पढ़ता था। लेकिन आँखों में नींद भरी होने के कारण उसकी समझ में कुछ नहीं आता था। इसी कारण इस बार परीक्षा में उसके नंबर बहुत कम आए थे।

एक दिन उसने अपनी मम्मी से कहा-‘मम्मी, मेरा दिमाग नहीं है। इसलिए मुझे कोई चीज़ समझ में नहीं आती और मेरे नंबर इतने कम आते है।’
‘अरे तो इसमें घबराने की क्या बात है, सुबह सुबह भगवान जी बच्चों को बुद्धि दान में देते हैं। तुम भी सुबह उनसे दान में थोड़ी-सी बुद्धि ले लेना।’ मम्मी ने नट्टू को बताया।
सच मम्मी, क्या भगवान सचमुच मुझे बुद्धि दान में दे देंगे?’ नट्टू ने आश्चर्य से पूछा।
‘देंगे क्यों नहीं भला, पर सोच लो इसके लिए तुम्हें सुबह जल्दी उठना पड़ेगा।’ ‘ठीक है मम्मी, मैं कल से जल्दी उठ जाया करूंगा।’ नट्टू ने बड़े उत्साह से कहा। अगले दिन नट्टू सुबह पाँच बजे ही उठ गया और अपनी माँ से भगवान के बारे में पूछने लगा कि वो कब आएंगे।

‘अरे बेटा, भगवान जी किसी भी दिन आ सकते हैं। तब तक तुम ऐसा करो नहा-धो कर अपनी किताब लेकर बैठ जाओ। ऐसे तुम्हारा समय भी कट जाएगा, और जब भगवान जी आएंगे में तुम्हें सूचित कर दूंगी।’ मम्मी ने नट्टू को समझाते हुए कहा।

इस प्रकार नट्टू हर-रोज़ सुबह जल्दी उठ जाता, और अपनी किताब लेकर भगवान का इंतज़ार में पढ़ने बैठ जाता। धीरे-धीरे एक महीना बीत गया। नट्टू की छमाही परीक्षा भी आ गई। परीक्षा में उसने प्रथम श्रेणी प्राप्त की। वह दौड़ा-दौड़ा अपनी माँ के पास पहुँचा और उन्हें यह खुश-खबरी सुनाई।

माँ ने उसका माथा चूम लिया।

‘माँ, एक बात तो बताओ?’ अचानक नट्टू ने पूछा। ‘हाँ बेटा पूछो क्या बात है?’ माँ ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फिराते हुए कहा।

‘माँ, वो भगवान जी तो एक बार भी नहीं आए और न ही उन्होंने मुझे बुद्धि दान में दी, फिर भी मैं इतने अच्छे नंबरों से कैसे पास हो गया?’

‘बात यह है बेटे कि भगवान जी सबको एक सम्मान बुद्धि देते हैं। लेकिन उसका सही उपयोग तभी है जब हम मेहनत करें। अब तुम अपना उदाहरण ही लो तुम रात को देर तक पढ़ते थे, पर तुम्हारी समझ में कुछ नहीं आता था क्योंकि उस समय तुम्हें नींद आ रही होती थी, और रात को देर से सोने के कारण तुम सुबह जल्दी भी नहीं उठ सकते थे। सुबह का समय पढ़ाई के लिए सबसे उपयुक्त होता है, इसलिए मैंने सोचा कि तुम्हें सुबह जल्दी उठाया जाए। ताकि तुम सुबह-सुबह शांत व ठंडे वातावरण में पढ़ सको।’ माँ ने नट्टू को बताया।

श्री मम्मी, तुम कितनी अच्छी हो।’ नट्टू ने कहा और अपनी माँ से लिपट गया।

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