Help Guide : माँ बनने से पहले आपको क्या करना है? जानिये पूरी सही जानकारी

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क्या किसी विशेषज्ञ से जाँच कराना जरूरी है?

यदि आप माँ बनने का प्लान बना रही हैं तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से जाँच करवाने की जरूरत नहीं है। आप अपनी उसी डॉक्टर से मिल सकती हैं, जिनसे आप निरन्तर जाँच करवाती आई हैं। इस जाँच से किसी की मेडिकल कमी का पहले ही पता चल जाएगा और इलाज मे आसानी होगी। आपकी डॉक्टर आपको उन दवाओं से भी दूर रख पाएंगी, जिन्हें आपको गर्भावस्था के दौरान नहीं खाना चाहिए। आप अपने वजन, भोजन तथा अन्य नित्यचर्याओं एवं आदतो पर अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर सकती हैं।

Pregnancy related Tips in hindi

गर्भ धारण करने से पहले अच्छे डॉक्टर की खोज

यह कोई मुश्किल काम नहीं होना चाहिए। किसी दाई, मिडवाइफ या गर्भ धारण के बाद सलाह व उपचार के लिए डॉक्टर की तलाश शुरू कर दे। आप अभी गर्भवती नहीं हैं। लेकिन आगे चल कर तो आप काफी व्यस्त होने वाली हैं। इसलिए पहले पूछताछ कर लें, राय लें और अपने लिए योग्य डॉक्टर तलाश कर लें।

पिछली गर्भावस्थाओं को अनदेखा न करें

अगर आपकी पिछली गर्भावस्था या गर्भावस्थाओं में कोई मुश्किल पेश आई थी, समय से पहले या बाद मे प्रसव हुआ था या एक से अधिक बार गर्भपात हो चुके हों तो हर बात अपने डॉक्टर को बताएँ, जिससे फिर किसी मुश्किल या असुविधा का सामना न करना पड़ें।

How to care and checkup during Pregnancy  

अनुवांशिक रोग की सम्भावना को अनदेखा न करें

अगर आपके माता-पिता अथवा परिवार के सदस्य किसी विशेष रोग के शिकार रहे हों या आपके परिवार में कोइ्र अनुवांशिक बीमारी हो और आपको स्वयं में भी उस बीमारी का कोई लक्षण पता चले तो डॉक्टर से जेनेटिक स्क्रीनिंग के बारे मे राय लें। यदि आप काकेसियन हैं तो सिस्टिक फाइबरोसिस, यहूदी-यूरोपियन हैं तो टे-शेक अफ्रीकी हैं तो सिकल सैल ट्रैट या फिर ग्रीक, इटैलियन, दक्षिण पूर्व एशियाई या फिलीपिनो मूल से है, तो आप थैलासीमिया रोग से ग्रस्त हो सकती हैं।
कई बार गर्भपात होना, किसी रक्त सम्बन्धी से विवाह होना, काफी समय तक गर्भ धारण न कर पाना, जैसे कारणां मे भी जेनटिक स्क्रीनिंग की आवश्यकता पड़ सकती हैं।
जाँच कराए

इस सारी छानबीन के दौरान आपको अपने लिए कुछ टेस्ट करवाने को भी तैयार रहना होगा। वे है

  1. एनीमिया की जाँच के लिए हीमोग्लोबिन या हिमैटोक्रिट जाँच।
  2. आर एच फैक्टर, यह देखने के लिए कि आप पोजिटिव है या निगेटिव। यदि आप निगेटिव है तो साथी की जाँच की जाएगी।
  3. ‘रूवेला टिटर’, वैरीसेला के लिए प्रतिरोध क्षमता की जाँच के लिए।
  4. हैपेटाइटिस बी यदि आपने इसका टीका नहीं लगवाया और आप कोई हेल्थ वर्कर हैं।
  5. साइटोमैगालोवायरस एंटीबॉडीज़ जाँच, ताकि पता लग सके कि यदि आप ने इसका इलाज कराया है तो इसके 6 माह तक गर्भ धारण न करें।
  6. टाक्सोप्लाप्ज़मोसिस टिटर, आपकी कोई पालतू बिल्ली है, जो बाहर घूमती है, कच्चा माँस खाती है या आप दस्तानां के बिना बागवानी करती हैं। यदि टीका लगा हो तो इस बात मे घबराने की कोई बात नहीं है। यदि नहीं लगा हों तो, सावधानी बरते।
  7. थाइरॉइड फंक्शन, इससे गर्भावस्था प्रभावित हो सकती है। यदि आप या परिवार को यह रोग था या आपको इसके लक्षण दिखें तो इसकी जांच अवश्य करवाए।

इलाज करवाएं

  1. यदि किसी भी जाँच में कुछ पता चले तो उसका इलाज अवश्य कराएं। कोई भी छोटी-मोटी सर्जरी या ऐसा कोई भी इलाज, जिसे आप टालती आ रही थीं, अब करवा लें। कहीं ऐसा न हो कि वह गर्भावस्था में समस्या पैदा कर दे ऐसी परेशानियों मे निम्नलिखित शामिल हो सकता है।
  2. यूटेराइन पोलिप्स, फिबरॉयड्स सिस्ट या बेनिग ट्यूमर।
  3. एंडोमीट्राओसिस।
  4. पेल्विक इंफ्लामेट्री रोग।
  5. मूत्राशय में जलन, खुजली अथवा किसी अन्य प्रकार का संक्रमण

जरूरी टीके अवश्य लगवाएँ

सतर्कतावश कई बीमारियों के टीके लगवा लेना श्रेयष्कर है। अगर आपने पिछले आठ-दस सालों में टिटनस-डिप्थीरिया बूस्टर का टीका नहीं लगवाया है तो उसे लगवाएं। मीज़ल्स, मम्स और रूबेया का टीका न लगा हो तो उसे भी लगवाएं। फिर गर्भधारण के लिए एक महीना इंतजार करें। यदि आप पहले ही गर्भवती हो चुकी हैं, तो भी चिन्तित होने की कोई बात नहीं है। चाहे आपको हेपेटाइटिस बी या चिकनपॉक्स का कोई डर नहीं हैं। लेकिन अब इसके लिए प्रबंध करें। अगर आपकी आयु 26 साल से कम है, तो एचपीवी की तीनां डोज़ लेनी होंगी, अतः अभी से सुनियोजित प्लान बना लें।

शूगर और अस्थमा जैसे क्रॅानिक रोगों पर नियन्त्रण रखें

अगर आप गर्भ धारण करने जा रही हैं और शूगर (मधुमेह), अस्थमा (दमा), हृदय रोग एपीलेप्सी या किसी भी क्रॉनिक यानी लंबे समय तक चलने वाले रोग से ग्रस्त हैं तो गर्भधारण से पहले डॉक्टर की राय ले लें व अपने रोग को कन्ट्रोल में रखें। यदि आप जन्म से ‘फिनाइलकीटोनयूरिया’ से ग्रस्त हैं तो अभी से फिनाइलेलेनिन युक्त आहार लेना शुरू कर दे और इसे गर्भावस्था मे भी जारी रखें। यह आपके व शिशु के, दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।
यदि आपको एलर्जी शॉट्स की जरूरत पड़ती है तो इन पर अभी से ध्यान दे। अवसाद आपकी प्रसन्नता से भरपूर गर्भावस्था में मुश्किल पैदा कर सकता है, अतः इसका उपचार पहले ही करवा लें।

गर्भनिरोधकों का प्रयोग बन्द करें

 

अब तक आप जो भी गर्भ निरोधक उपयोग में लाती रही हैं। गर्भ धारण से कई महीने पहले से ही उनका इस्तेमाल पूरी तरह बन्द करना होगा। आपको ध्यान रखना होगा कि आपके प्रजनन तंत्र सही तरह से काम करने लगें, तभी गर्भ धारण करना उचित होगा। गर्भ धारण से पहले कम से कम दो मासिक चक्र सही तरीके से हो जाएँ। कभी-कभी मासिक चक्र को नियमित होने मे दो-तीन या फिर उससे भी अधिक महीने लग सकते हैं। यदि आप ‘आईयूडी’ लगाती हैं तो इसे निकलवा दे। डेपोप्रोवेरा बन्द करने के छः माह तक इंतजार करें। कई महिलाएँ तो इसे बन्द करने के दस माह तक भी गर्भवती नहीं हो पातीं। आप इसी के हिसाब से अपनी योजना बनाएं और गर्भ धारण से पहले अपने डॉक्टर से सलाह-मशविरा भी कर लें।

गर्भ धारण से पहले विटामिन की खुराक

गर्भ धारण से पहले आपको अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा। फॉलिक एसिड की भरपूर मात्रा को भोजन में शामिल करने के बावजूद आपको गर्भधारण से दो माह पहले से, प्रौनैटल पूरक के रूप मे 400 एमसीजी की खुराक लेनी होगी। अध्ययन से पता चलता है कि जो महिलाएँ गर्भधारण से पहले या शुरूआती सप्ताहां में मल्टी विटामिन की खुराक लेती हैं, उन्हें उल्टी व जी मिचलाने जैसी शिकायत नहीं होती। इसमें 15 एमजी जिंक की मात्रा भी होनी चाहिए, जिससे गर्भधारण की क्षमता बढे़गी। किन्तु ध्यान दे कि जरूरत से ज्यादा पोषक तत्वों की मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर ही विटामिनों का सेवन करें।

घर के स्टॉक की दवाएँ इस्तेमाल करने से पहले

आपको सिरदर्द हुआ और आपने घर में पड़ी कोई भी पेनकिलर ले ली। गर्भावस्था अथवा गर्भावस्था से पहले ऐसा न करें। कुछ दवाएं ऐंसी होती हैं, जिन्हें गर्भावस्था से पहले या इसके दौरान लेना खतरनाक हो सकता हैं। अगर आप नियमित रूप से या कभी-कभी कोई दवा ले रही हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।
कोई भी दवा चाहें वह हर्बल हो या आयुर्वेदिक जरूरी नहीं कि वह सुरक्षित ही हों। कई हर्बल दवाएं गर्भधारण में भी रूकावट डाल सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की अनुमति के बिना हरगिज न लें।

आपका वजन कितना है?

गर्भधारण से पहले आपको अपने वजन पर भी ध्यान देना होगा। बहुत कम वजन और खून की कमी न हो। यदि ऐसा हो तो अपना वजन बढ़ाएँ और विटामिन्स और उपयुक्त आहार द्वारा खून की कमी को दूर करें। फॉलिक एसिड की भरपूर मात्रा को भोजन में शामिल करने के बावजूद आपको गर्भधारण से दो माह पहले से, प्रौनैटल पूरक के रूप मे 400 एमसीजी की खुराक लेनी होगी। जो महिलाएँ गर्भधारण से पहले या शुरूआती सप्ताहां में मल्टी विटामिन की खुराक लेती हैं, उन्हें उल्टी व जी मिचलाने जैसी शिकायत नहीं होती। इसमें 15 एमजी िंजंक की मात्रा भी होनी चाहिए, जिससे गर्भधारण की क्षमता बढे़गी। हालांकि कुछ जरूरत से ज्यादा पोषक तत्वों की मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर ही अपनी खुराक एवं विटामिन्स का सेवन करें।
वजन कम या ज्यादा होना, ये दोनां स्थितियां ही गर्भधारण क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। यदि आपने गर्भ धारण कर भी लिया तो गर्भावस्था में कई तरह की जटिलताएं आ सकती हैं। जरूरत के हिसाब से ही कैलोरी की मात्रा घटाएं या बढ़ाएं। वजन घटाना हो तो धीरे-धीरे घटाएं और गर्भधारण की योजना को 2 महीने तक टाल दे। डॉक्टर की सलाह से संतुलित भोजन लेना शुरू कर दे, जिससे आपका शिशु आपके गर्भ में किसी प्रकार की असुविधा न महसूस करे।

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