आज का संदर्भ – अध्याय 9 शलोक 19-21

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हरे कृष्ण। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि इस संसार उत्पत्ति से पहले भी मैं था संसार की प्रलय के बाद में भी मैं रहने वाला हूँ आदि अंत में होने के कारण मध्य में तो हो ही गया। कहने का मतलब है कि प्रभु अनन्त हैं। कितने ही रिषि मुनियों में बड़े बड़े तप प्रभु की माया को जानने के लिये किये लेकिन अंत में नेति नेति ही कहना पडा। अर्थात इसका कुछ पता नहीं इसका कोई आदि अंत नहीं,
“हरि अनन्त , हरि कथा
अनन्ता”

हे अर्जुन सूर्य की गरमी हो या वर्षा का पानी। प्रकृति का पूरा चक्र भगवान के कारण ही चल रहा है। जो भी मनुष्य निष्ठापूर्वक परमार्थ के लिये कर्म करते हैं उनकी योग क्षेम भगवान के जम्मे हो जाती है। योग का अर्थ है किसी वस्तु का प्राप्त होना और क्षेम का मतलब है प्राप्त वस्तु की रक्षा करना। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि ऐसे ज्ञानी व्यक्ति को मैं अपना आत्मीय मानता हूँ और उसे मोक्ष प्रदान करता हूँ। जन्म मरण के कारण होने वाले दुखों से मुक्ति दिला कर उसे परमानन्द की प्राप्ति हो जाती है। jkg

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