मधुमेह और व्यायाम

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मधुमेह एक तेजी से फैल रही लाइफस्टाइल डिसीज है, जिसे नियमित कसरतों से आसानी से नियंत्रण में रखा जा सकता है। मधुमेह होने का मुख्य कारण है शारीरिक श्रम की कमी तथा अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, जिसकी चपेट में आजकल के युवा भी आ चुके हैं।

दरअसल स्कूली बच्चों में मोटापे की समस्या को बहुत चिंता की दृष्टि से देखा जा रहा है। चिंता का विषय इसलिए भी है कि भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी में तब्दील हो गया है। शारीरिक श्रम में निरंतर कमी हो रही है तथा आरामतलब जीवनशैली पैर पसारती जा रही है।

यदि व्यक्ति के पैर संवेदना शून्य हो गए हों तो उसे तैराकी, साइकलिंग करना चाहिए। इसके अलावा शरीर के ऊपरी हिस्से के व्यायाम जैसे वेटलिफ्टिंग (फिटनेस एक्सपर्ट के निरीक्षण में एक दिन छोड़कर सप्ताह में तीन बार), स्ट्रेचिंग तथा हैंड फ्री व्यायाम करना चाहिए। 30-40 मिनट की एरोबिक्स व्यायाम करें। घरेलू काम जैसे साफ-सफाई एवं बागवानी भी एरोबिक्स जैसा ही व्यवस्थित व्यायाम है।

योग भी मधुमेह नियंत्रण की उपयोगी विधि है। सुखासन, सूर्य नमस्कार, अर्धमत्स्येंदासन, ताडासन, मत्स्यासन, शिवासन, कपालभाती जैसे आसन डायबिटिक रोगियों के लिए लाभकारी हैं।

किसी भी व्यायाम को शुरू करने से पूर्व 5-10 मिनट का वार्मअप आवश्यक है। जो शरीर को व्यायाम के लिए तैयार करता है। व्यायाम समाप्त करने के बाद शांत हो जाएँ। दिल की धड़कनों को सामान्य स्तर पर लौटाने के लिए स्ट्रेचिंग आवश्यक है। नसों को 10 सेकंड तक खिंचाव की स्थिति में रखिए और फिर ढीला छोड़ दीजिए। लंबे समय तक स्ट्रेचिंग न करें। इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।

यह व्यायाम करते समय व्यक्ति की स्वयं की रुचि को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए, जिससे व्यक्ति दीर्घकाल तक व्यायाम गतिविधि अपनी स्वयं की पसंद से करता रहे।

किसी भी प्रकार का व्यायाम करने से पहले आपके चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें।

मधुमेह के रोगी को हमेशा फिटनेस सेंटर में मौजूद काउंसिलर अथवा एक्सपर्ट ट्रेनर से अपने वर्कआउट प्रोग्राम के लिए सलाह लेना चाहिए। ऐसी मशीनों पर कसरत करना फायदेमंद होता है, जो चोट पहुँचाने की बजाय मांसपेशियों को ताकतवर बनाती हों।

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